भारतीय वायुसेना (IAF) को आधुनिक तकनीकों के साथ हाईटेक बनाया जा रहा है. इसी क्रम में इंडियन एयर फोर्स के फाइटर जेट मिग-29 के बेड़े को एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (ASRAAM) से लैस करने की तैयारी है. यानी आने वाले समय में मिग-29 और भी घातक साबित होंगे. LCA तेजस और जैगुआर विमान में इनको पहले से ही लगाया जा चुका है. आइए जानते हैं पाकिस्तान और चीन के JF-17 के सामने यह कहां टिकते हैं.
क्या है ASRAAM?
बता दें कि ASRAAM यूरोपीय एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है. यह चौथी पीढ़ी की हाईटेक मिसाइल है. ASRAAM की रेंज 25 किलोमीटर से ज्यादा है. इसे पूरी वायुसेना में R-73 की जगह लाने की योजना है. रक्षा मंत्रालय ने 25 मार्च को इसको लेकर प्रस्तावों के लिए अनुरोध जारी किया. इस कॉन्ट्रैक्ट में मिसाइल के साथ आवश्यक लॉन्चर, संबंधित उपकरण और विमान चालक दल और ग्राउंड वर्कर्स के लिए प्रशिक्षण भी शामिल होगा.
भारत के पास कितने मिग-29?
भारतीय वायुसेना के बेड़े में MiG-29 फाइटर जेट की संख्या 55 से ज्यादा है, इसमें 8 ट्रेनर वर्जन भी शामिल हैं. ASRAAM से लैस होने के बाद इसमें से पुरानी R-73 मिसाइलों को हटाया जाएगा. ASRAAM की रेंज जहां 25 किलोमीटर से ज्यादा है, जबकि R-73 की रेंज 10 से 15 किलोमीटर है. यह 1980 के दशक की मिसाइलें हैं.
ASRAAM का निर्माण MBDA कंपनी करती है. भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और MBDA के बीच 2021 में समझौता हुआ था. हैदराबाद में इसके असेंबली और टेस्टिंग सेंटर का निर्माण किया जा रहा है.
ASRAAM की क्या खासियत?
ASRAAM हाईटेक मिसाइल मानी जाती है. यह हीट-सीकिंट टेक्निक पर काम करती है. इसका हमला टारगेट के एकदम सटीक माना जाता है. नजदीकी हवाई युद्ध के लिए इसे तैयार किया गया है. यह फायर एंड फॉरगेट के आधार पर काम करती है. पायलट के लिए यह असरदार हथियार के तौर पर काम करता है, इसको लॉन्च करने के बाद पायलट को कंट्रोल नहीं करना होता है. ASRAAM का वजन 88 किलोग्राम होता है और यह 2.9 मीटर लंबी होती है. इसमें हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड लगा होता है.
चीन और पाकिस्तान की बात करें तो इन दोनों मुल्कों के पास भी इस तरह की मिसाइलें हैं. जिनको PL-10 और PL-10E के नाम से जाना जाता है. चीन ने PL-10 को 2015 में शामिल किया था, इसे J-10C, J-16 और J-20 जैसे फाइटर जेट में लगाया जाता है. जिसकी रेंज 20 से 30 किलोमीटर बताई जाती है. वहीं, पाकिस्तान ने PL-10E को JF-17 ब्लॉक III में लगाया है. ASRAAM का रॉकेट मोटर बड़ा होने की वजह से इसे ज्यादा दूरी और बेहतर परफॉर्मेंस मिलती है.