पाकिस्तान की तरफ से बैन एक आतंकवादी संगठन से जुड़े न्यायिक मामलों पर बयान दिया गया. इस बयान को लेकर विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि हम पाकिस्तान की तरफ से बैन आतंकवादी संगठन और उसके सदस्यों के समर्थन में जारी बयान को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं. भारत के आंतरिक मामलों या उसके न्यायिक प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को अधिकार नहीं है.
इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि हालांकि, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि एक ऐसा देश, जो लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, उसने हिंसा और बेगुनाह लोगों की हत्या को सही ठहराने वाला ऐसा बयान दिया है. झूठ फैलाने और बेतुकी बातें करने के बजाय, पाकिस्तान को उन गंभीर और सुनियोजित मानवाधिकार उल्लंघनों पर आत्ममंथन करना चाहिए, जिन्हें वह लगातार अंजाम दे रहा है.
Our response to media queries regarding statement made by Pakistan on judicial matters concerning a banned terrorist organisation
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) March 25, 2026
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पाकिस्तान ने दिल्ली की एक अदालत में कश्मीरी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के पूरे मामले को खारिज कर दिया है. इसके अलावा उनके दो सहयोगी फहमीदा सोफी और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा को भी सिरे से नाकार दिया है. साथ ही कहा है कि यह इंसाफ की बड़ी गलती है.
इधर, भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि यह फैसला कठोर यूएपीए कानून के तहत दिया गया है. यह भारत के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में बुनियादी मानवाधिकारों और अभिव्यक्तियों की आजादी को कुचलने के स्पष्ट उदाहरण है.
14 जनवरी को दिल्ली की कोर्ट ने सुनाया था फैसला
बता दें, दिल्ली की विशेष एनआईए कोर्ट ने मंगलवार को दुख्तरान-ए-मिल्लत के चीफ आसिया अंद्राबी को यूएपीए के तहत अजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह फैसला जस्टिस चंदरजीत सिंह की पीठ ने लिया है. इसके अलावा कोर्ट ने अंद्राबी की दो साथियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी 30-30 साल की सजा सुनाई है. 14 जनवरी को कोर्ट ने फैसला सुनाया था.
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