भारत में हमले करने की फिराक में पाकिस्तान! ISI ने तिराह घाटी में बना दिया लश्कर-ISKP का ज्वाइंट हेडक्वार्टर


जम्मू कश्मीर में आतंकी एक बार फिर बड़े हमले को अंजाम देने की साजिश में जुट गए हैं. आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के आदेश पर इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) के साथ मिलकर भारत में आने वाले दिनों में आतंकी हमला करने की योजना बनायी है.

इसके लिए जम्मू कश्मीर में 12 फिदायीन आतंकियों की एक फौज भी बनायी है जिन्हें तीन ग्रुप मे बांटा गया है जिसकी कमान आतंकी अबू हुरैरा, मोहम्मद उमर उर्फ खरगोश और मोहम्मद रिजवान उर्फ अबू दुजाना के हाथों में है. लश्कर-इस्लामिक स्टेट के इस हाइब्रिड मॉड्यूल को लश्कर ए तैयबा का टॉप कमांडर हुजैफा बक्करवाल संभाल रहा है.

तिराह घाटी में बनाया लश्कर-ISKP का ज्वाइंट हेडक्वार्टर

लश्कर ए तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान एक ज्वाइंट हेडक्वार्टर पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खैबर जिले की पहाड़ी इलाके में ISI ने स्थापित कर दिया है. इस हेडक्वार्टर की कमान आतंकी हाफिज ज़ुबैर मुजाहिद को दी गई है, जो इस्लामिक स्टेट का कमांडर बनने से पहले लश्कर ए तैयबा और पाकिस्तानी सेना की खुफिया यूनिट (मिलिट्री इंटेलिजेंस) के बीच में लश्कर ए तैयबा के प्रतिनिधि के रूप में काम करता था.

आतंकियों की घुसपैठ का सारा कामकाज शमशेर नाई, रफीक नाई और कासिम लाला की मदद से चलता था. हालांकि साल 2019 में हाफिज ज़ुबैर मुजाहिद को लश्कर ने इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) में कमांडर बना कर भेज दिया और इसने बलूचिस्तान में ISKP का बेस बना कर अफगानिस्तान में कई हमले करवाये.

आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने की तैयारी

अब लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान के ज्वाइंट हेडक्वार्टर की कमान भी इसी हाफिज ज़ुबैर मुजाहिद को दी गई है. इसका काम अफगानिस्तानी नागरिकता वाले आतंकियों को भारत के जम्मू कश्मीर में घुसपैठ करवाना है ताकि पहले से मौजूद इस्लामिक स्टेट-लश्कर ए तैयबा के 12 सदस्यीय मॉड्यूल में अफगानी आतंकियों की भी भर्ती हो पाए.

जहां इस समय इस मॉड्यूल के तीनो कमांडर अबू हुरैरा, मोहम्मद उमर उर्फ खरगोश और मोहम्मद रिजवान उर्फ अबू दुजाना तीनों पाकिस्तानी है और 4-4 आतंकियों का ग्रुप कमांड कर रहे हैं तो नई रणनीति के तहत इस मॉड्यूल को बड़ा करके हर ग्रुप में अगले 6 महीने में ISI ने 15-20 आतंकियों को रखने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए 45-60 अफगानिस्तान के आतंकियों को जोड़ने के लिए ISI ने खैबर पख्तूनख्वा की तिराह घाटी में ISKP और लश्कर का ज्वाइंट हेडक्वार्टर भी सेटअप करवा दिया है.

भारत में हमला करने की फिराक में पाकिस्तान

सूत्रों के मुताबिक नए सिस्टम के तहत जहां 45-60 अफगानी आतंकियों को भारत में हमला करने के लिए तैयार करना और ISKP-लश्कर के हाइब्रिड मॉड्यूल से जोड़ना है तो बाकी के सदस्यों का इस्तेमाल ISI खैबर पख्तूनख्वा में TTP के खिलाफ करेगी और ISKP से तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हमला करवाएगी जैसा बलूचिस्तान में ISI ISKP की मदद से बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और BLF (बलूच लिबरेशन फ्रंट) पर हमला करवा कर करती थी. यानी ISKP-लश्कर के तिराह घाटी में बनाए गए ज्वाइंट हेडक्वार्टर से ISI एक तीर से दो शिकार करेगी.

सूत्रों के मुताबिक यह ज्वाइंट मॉड्यूल पाकिस्तानी सेना के X कॉर्प्स के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एमर एहसान नवाज और ISI के PoK में सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फैक अयूब के दिमाग की उपज है. इसे ऑपरेशन सिंदूर के 8 महीने बाद ना सिर्फ इन दोनों ने अपने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर तैयार किया है, बल्कि ऑपरेशनल भी कर दिया है.

रावलपिंडी से दिया जाएगा ऑर्डर

सूत्रों के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) की इस ज्वाइंट ब्रिगेड के अफगानी आतंकियों को भारत के जम्मू कश्मीर में घुसपैठ करवाने का काम रफीक नाई और शमशेर नाई ही करेंगे, जो पिछले 2 दशक से जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के आतंकियों को भारत में घुसाने का काम करते रहे हैं. साथ ही लश्कर ए तैयबा का टॉप कमांडर हुज़ैफा बक्करवाल ही इस हाइब्रिड मॉड्यूल के आतंकियों के ग्रुप के साथ साथ रावलपिंडी में बैठ कर सैटेलाइट फोन पर बात करेगा और तैयार ऑपरेशन की जानकारी देगा.

पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में कई अफगानी की मौत

पाकिस्तानी सेना पिछले 1 साल से लगभग हर महीने खैबर जिले के पहाड़ी इलाकों में हवाई हमले करके 60 से ज्यादा आम लोगों को मौत की घाट उतार चुकी है. इसमें 22 सितंबर की भी घटना शामिल है जब एक ही दिन में 30 आम नागरिकों को पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमले में मौत की घाट उतार दिया था, जिसमें 9 बच्चे भी शामिल थे. साथ ही पाकिस्तानी सेना ने अकेले खैबर जिले में ही 35 से ज़्यादा आतंकियों को भी मारने का दावा किया है और 6 से ज़्यादा मरकजों को भी एयरस्ट्राइक में तबाह किया है जिन्हें पाकिस्तानी सेना तहरीक ए तालिबान का ठिकाना करार देती है.

ऐसे में वैश्विक समुदाय के सामने अब दो बड़े सवाल उठ रहे हैं. पहला खैबर जिले के पहाड़ी इलाके में एंटी टेरर ऑपरेशन चलाने के नाम पर 60 से ज़्यादा मासूमों को मारने वाले पाकिस्तान पर कैसे भरोसा किया जाए जो उसी जगह पर इस्लामिक स्टेट और लश्कर ए तैयबा का ज्वाइंट हेडक्वार्टवर खड़ा कर रहा हो? दूसरा आख़िर कब तक पाकिस्तान भारत के साथ आतंक वाले अपने प्रॉक्सी वॉर को नई नई रणनीति के माध्यम से चलता रहेगा?



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