भारत से पानी की भीख मांगेगा पाकिस्तान! चिनाब नदी पर 4 बड़े प्रोजेक्ट्स तेज किए, क्या है नया दांव?


सिंधु जल संधि को ठंडे बस्ते में डालने के बाद भारत ने चिनाब नदी पर चार बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं. यह प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर में हैं और इनसे बिजली पैदा होगी. साथ ही पानी के प्रवाह पर कंट्रोल बढ़ेगा. चिनाब नदी सिंधु बेसिन का हिस्सा है, जो पाकिस्तान के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि वहां की 90% से ज्यादा खेती और पानी की जरूरत इसी पर निर्भर है.

केंद्रीय मंत्री खट्टर ने दौरा किया
  
केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जम्मू-कश्मीर में दो दिनों तक इन डैम साइट्स का दौरा किया. उन्होंने प्रोजेक्ट की प्रगति देखी और सख्त समय सीमा लागू करने के आदेश दिए. अब इन प्रोजेक्ट्स को जल्दी पूरा करने का लक्ष्य तय है.

यह 4 बड़े प्रोजेक्ट्स कौन से हैं?

  • पाकल दुल: किश्तवाड़ जिले में बन रहे इस डैम की क्षमता 1,000 मेगावाट होगी. यह भारत का सबसे ऊंचा डैम होगा, जिसकी ऊंचाई 167 मीटर होगी. यह पश्चिमी नदियों पर पहला स्टोरेज प्रोजेक्ट है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 में इसका शिलान्यास किया था. अब इसे दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य है.
  • किरु: किश्तवाड़ जिले में बन रहे इस डैम की ऊंचाई 135 मीटर होगी. इसे रन-ऑफ-द-रिवर टाइप बनाया जाएगा. पाकल दुल के साथ ही दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.
  • क्वार: इस डैम की ऊंचाई 109 मीटर है और यह रन-ऑफ-द-रिवर रहेगा. इसके लिए जनवरी 2024 में नदी का डायवर्शन पूरा हुआ था. क्वार प्रोजेक्ट को पूरा होने की तारीख मार्च 2028 है.
  • रतले: इस डैम की क्षमता 850 मेगावाट होगी और इसे 133 मीटर ऊंचा बनाया जाएगा. 2024 में नदी टनल से डायवर्ट की गई थी और अब इसका कंक्रीट वर्क शुरू हो चुका है. इसे 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा.  पाकिस्तान ने इसके स्पिलवे डिजाइन पर आपत्ति जताई थी.

इनके अलावा दुल्हस्ती स्टेज-2 प्रोजेक्ट को भी दिसंबर 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने मंजूरी दी है. पाकिस्तान ने इस पर भी आपत्ति जताई, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया. ये सभी प्रोजेक्ट चिनाब बेसिन में हैं. पाकिस्तान इनकी निगरानी कर रहा है और पहले से ही रतले और दुल्हस्ती-2 पर आपत्तियां जता चुका है.

इन प्रोजेक्ट्स से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?

चिनाब नदी पाकिस्तान की ‘लाइफलाइन’ है. यहां से आने वाला पानी पाकिस्तान की ज्यादातर सिंचाई, डैम और नहरों के लिए इस्तेमाल होता है. 9 में से 10 पाकिस्तानी इसी पानी पर निर्भर हैं. भारत के इन कदमों से पानी के प्रवाह पर नियंत्रण बढ़ेगा, जिससे पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बढ़ रहा है.

यह फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद आया है. भारत अब इन नदियों का पूरा हाइड्रोपावर पोटेंशियल इस्तेमाल करने की तैयारी में है. आगे की स्थिति इन प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर निर्भर करेगी.



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