‘भ्रम फैलाया जा रहा, 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा…’, अरावली विवाद पर क्या बोले पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव


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अरावली पहाड़ियों को लेकर देश के कई हिस्सों में काफी दिनों से बवाल मचा हुआ है. इस बवाल के बीच केंद्र सरकार ने रविवार (21 दिसंबर, 2025) को बड़ा बयान दिया है. केंद्र सरकार ने अरावली पहाड़ियों को लेकर उन सभी रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया कि अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव किया गया और केंद्र सरकार ने अरावली की पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर खनन करने की अनुमति दी है.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार (21 दिसंबर, 2025) को सुंदरबन टाइगर रिजर्व में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से इस पूरे अरावली पहाड़ियों के क्षेत्र में नए खनन पट्टों को लेकर पहले से ही रोक लगाई गई है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से मंजूर किया गया एक ढांचा अरावली पर्वत शृंखला को पहले से काफी ज्यादा मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है और तब तक खनन पट्टों पर पूरी तरह से रोक लगाता है, जब तक एक व्यापक प्रबंधन योजना को फाइनल नहीं किया जाता है.

चार राज्यों के 39 जिलों तक फैली है अरावली पर्वतशृंखला- केंद्रीय मंत्री

उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतश्रृंखला को लेकर कोई भी रिलैक्सेशन नहीं दिया गया है, जो चार राज्यों, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात, के 39 जिलों तक फैला है. अरावली की पिटिशन 1985 से चल रही है. हम भी इस पक्ष का समर्थन करते हैं कि खनन के सख्त नियम होने चाहिए.” उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वीकृत परिभाषा के तहत अरावली क्षेत्र का 90 फीसदी से ज्यादा अधिक हिस्सा संरक्षित इलाके में दायरे में आ जाएगा, लेकिन इसे लेकर काफी ज्यादा भ्रम फैलाया जा रहा.

सरकार ने अरावली पर्वतशृंखला के 100 मीटर के मानदंड को लेकर उठे विवाद को लेकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी चारों राज्यों में अरावली पहाड़ियों के लिए एक परिभाषा तय करने को कहा गया, ताकि किसी को भी किसी तरह का भ्रम न हो और ऐसे में इसका गलत इस्तेमाल न किया जा सके, जिसके तहत पहाड़ के तल के करीब खनन का कार्य जारी रहता था.

पहाड़ी के आधार से लेकर चोटी तक 100 मीटर को है संरक्षण- केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि अरावली की पहाड़ियों के ऊपरी हिस्से के 100 मीटर तक संरक्षण है और नीचे में खुदाई हो सकती है, ऐसा बिल्कुल नहीं है, बल्कि पहाड़ी का आधार अगर जमीन के अंदर भी 20 मीटर होता है तो वहां से लेकर ऊपरी हिस्से तक 100 मीटर को संरक्षण प्राप्त है. इसके अलावा, अरावली पर्वतशृंखला के पहाड़ियों के बीच अगर 500 मीटर के गैप है तो वो भी अरावली रेंज ही मानी जाएगी. इस परिभाषा के आने के बाद अरावली की 90 फीसदी से ज्यादा का इलाका संरक्षित क्षेत्र में आ गया.

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