मिसाइल, टॉरपीडो और हेलिकॉप्टर से लैस… फिर भी डूब गया ईरान का IRIS Dena, जानें इस युद्धपोत की ताकत


US Navy Attack Iran Warship: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच समुद्र में एक बड़ा सैन्य हमला सामने आया है. अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में ईरान के एक आधुनिक युद्धपोत पर पनडुब्बी के जरिए हमला कर दिया. यह हमला खुले समुद्र में हुआ, जिसके बाद ईरानी नौसेना का युद्धपोत पूरी तरह तबाह होकर समुद्र में डूब गया. बताया जा रहा है कि जहाज पर 100 से ज्यादा लोग सवार थे और इस हमले में लगभग 80 नौसैनिकों की मौत हो गई.

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है. खासकर श्रीलंका और भारत जैसे हिंद महासागर से जुड़े देशों के लिए इसे बड़ी रणनीतिक चिंता माना जा रहा है. क्योंकि जिस युद्धपोत को निशाना बनाया गया, वह हवा, समुद्र और पानी के नीचे तीनों मोर्चों पर लड़ने की क्षमता रखता था. इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना ने उसे निशाना बनाकर पूरी तरह तबाह कर दिया.

आईआरआईएस डेना था ईरान का आधुनिक युद्धपोत

जिस युद्धपोत को निशाना बनाया गया उसका नाम आईआरआईएस डेना था. यह ईरान की मौज क्लास फ्रिगेट श्रेणी का जहाज था और इसे ईरानी नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता था. इस जहाज का पेनेंट नंबर 75 था और यह ईरानी नौसेना के दक्षिणी बेड़े का हिस्सा था. इसका नाम ईरान के मशहूर पहाड़ माउंट डेना के नाम पर रखा गया था.

ईरान में ही हुआ था युद्धपोत का निर्माण

आईआरआईएस डेना का निर्माण ईरान के बंदर अब्बास स्थित नौसैनिक कारखानों में किया गया था. इसका निर्माण कार्य साल 2012 में शुरू हुआ था. इसके बाद 2015 में इसे समुद्र में उतारा गया और 13 जून 2021 को इसे आधिकारिक रूप से ईरानी नौसेना में शामिल कर लिया गया. खास बात यह थी कि यह जहाज पूरी तरह ईरान की स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया था. इसके इंजन से लेकर हथियार सिस्टम तक कई महत्वपूर्ण हिस्से देश में ही बनाए गए थे.

95 मीटर लंबा युद्धपोत, 140 नौसैनिकों की व्यवस्था

इस युद्धपोत की लंबाई करीब 95 मीटर थी और चौड़ाई 11.1 मीटर थी. इसका ड्राफ्ट लगभग 3.25 मीटर था. इसका कुल वजन यानी डिस्प्लेसमेंट करीब 1500 टन था. जहाज में दो 10,000 हॉर्सपावर के इंजन और चार डीजल जनरेटर लगाए गए थे. इन इंजनों की मदद से यह युद्धपोत अधिकतम 30 नॉट यानी करीब 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता था. जहाज पर कुल 140 नौसैनिकों के रहने और काम करने की व्यवस्था भी थी.

आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस था जहाज

आईआरआईएस डेना में आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली लगी हुई थी. इसमें अस्र 3डी पीईएसए लंबी दूरी का रडार लगाया गया था, जो करीब 300 किलोमीटर तक के दायरे में कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता था. दुश्मन के हमलों से बचने के लिए जहाज में चाफ लॉन्चर भी लगाए गए थे. ये सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों को भ्रमित करने का काम करते हैं.

एंटी शिप मिसाइलें और पनडुब्बियों से लड़ने की क्षमता

हथियारों की बात करें तो इस फ्रिगेट पर 76 एमएम की तेज फायरिंग करने वाली नौसैनिक तोप लगी थी. इसके अलावा 40 एमएम की फतह एंटी एयरक्राफ्ट गन भी मौजूद थी, जिसे बोफोर्स डिजाइन पर आधारित माना जाता है.
जहाज पर 20 एमएम की ओरलिकॉन तोपें भी लगी थीं. दुश्मन के जहाजों पर हमला करने के लिए इसमें सी-802 या नूर श्रेणी की एंटी शिप मिसाइलें तैनात थीं. हवाई हमलों से बचाव के लिए इसमें सय्याद-2 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी लगाई गई थीं.

पनडुब्बियों से मुकाबले के लिए खास व्यवस्था

पनडुब्बियों से मुकाबले के लिए इस युद्धपोत में 324 एमएम के हल्के टॉरपीडो लॉन्चर लगे थे. इसके अलावा जहाज में एक हेलिपैड भी था, जहां बेल 212 एंटी सबमरीन हेलिकॉप्टर को उतारा और उड़ाया जा सकता था यानी यह युद्धपोत समुद्र, हवा और पानी के नीचे तीनों मोर्चों पर लड़ने में सक्षम था.

हाल ही में भारत भी आया था यह युद्धपोत

आईआरआईएस डेना को साल 2022-23 में दुनिया के कई देशों की यात्रा के लिए भेजा गया था. हाल ही में यह इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 अभ्यास में भाग लेने के लिए भारत आया था. कार्यक्रम पूरा करने के बाद ही इसे निशाना बनाया गया. इसी वजह से इस हमले ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में चिंता बढ़ गई है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *