‘मैं शायद पुराने ख्यालों की हूं पर पत्नी ये नहीं कह सकती कि…’, अलग रह रहे कपल से बोलीं सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस नागरत्ना


सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 अगस्त, 2025) को शादी को लेकर एक अहम टिप्पणी की और कहा कि विवाह के बाद पति या पत्नी में से कोई यह नहीं कह सकता कि वे अपने जीवनसाथी से स्वतंत्र होना चाहते हैं. कोर्ट ने अलग रह रहे एक दंपति के मामले को लेकर सुनवाई करते हुए यह बात कही. दोनों के दो बच्चे हैं, पति सिंगापुर में रहता है और पत्नी भारत में. पत्नी का कहना है कि वो पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती, इस पर जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि वह शायद पुराने ख्यालों की हैं, लेकिन कोई पत्नी ये नहीं कह सकती कि मैं अपने पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने आगाह करते हुए कहा कि अगर कोई स्वतंत्र रहना चाहता है तो उसे विवाह नहीं करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम बिल्कुल स्पष्ट हैं. कोई भी पति या पत्नी यह नहीं कह सकता कि जब तक हमारा वैवाहिक संबंध है, मैं दूसरे जीवनसाथी से स्वतंत्र रहना चाहता/चाहती हूं. यह असंभव है. विवाह का मतलब क्या है, दो दिलों, व्यक्तियों का एक साथ आना. आप स्वतंत्र कैसे हो सकते हैं?’

कोर्ट ने दंपति से कहा कि अगर वे दोनों साथ रहेंगे तो हमें खुशी होगी क्योंकि बच्चे बहुत छोटे हैं. उन्हें घर टूटा हुआ देखने को न मिले. इसमें उनका क्या कसूर है. कोर्ट ने पति-पत्नी से कहा कि उनके बीच में जो भी मतभेद हैं, उनको सुलझाओ. कोर्ट ने कहा कि हर पति-पत्नी के बीच कोई न कोई विवाद होता ही है. इस पर पत्नी ने कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती है, तब कोर्ट ने कहा कि उन्होंने यह निर्देश दोनों को दिया है, किसी एक को नहीं.

पत्नी का कहना है कि उसका पति, जो सिंगापुर में रह रहा था और अब में भारत में है, इस मामले को सुलझाने के लिए तैयार नहीं है. वह सिर्फ मुलाकात का अधिकार और बच्चों की प्रोटेक्शन चाहता है. महिला हैदराबाद में रहती है कोर्ट ने महिला से पूछा कि वह अपने पति के पास सिंगापुर क्यों नहीं लौट रही है. बच्चों के साथ सिंगापुर लौटने में उसको क्या दिक्कत है.

महिला ने कुछ कठिनाइयों का हवाला देते हुए कहा कि सिंगापुर में पति की हरकतों के कारण उसके लिए वापस लौटना बेहद मुश्किल हो गया है. सिंगल मां होने के नाते आजीविका के लिए नौकरी की जरूरत पर जोर देते हुए महिला ने दावा किया कि उसे अलग रह रहे पति से कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला है.

पति के वकील ने कहा कि दोनों की ही सिंगापुर में काफी अच्छी नौकरी है, लेकिन पत्नी ने बच्चों के साथ सिंगापुर लौटने से इनकार कर दिया है.  बेंच ने कहा, ‘आपको (पत्नी को) नौकरी मिल सकती है, हो सकता है न मिले, लेकिन पति को आपका और बच्चों का भरण-पोषण करना होगा.’ साथ ही अदालत ने पति को पत्नी और बच्चों के लिए कुछ राशि जमा करने का सुझाव दिया. हालांकि, पत्नी ने कोर्ट से कहा कि वह किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती. जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘आप ऐसा नहीं कह सकतीं. शादी हो जाने के बाद, आप भावनात्मक रूप से अपने पति पर निर्भर हो जाती हैं. आर्थिक रूप से शायद न हों.’

उन्होंने कहा, ‘आप यह नहीं कह सकतीं कि मैं किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती. फिर आपने शादी क्यों की? मुझे नहीं पता, मैं शायद पुराने ख्यालों वाली हूं, लेकिन कोई भी पत्नी यह नहीं कह सकती कि मैं अपने पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती.’ महिला ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए कुछ समय मांगा है.

पीठ ने पक्षकारों से कहा, ‘आप सभी शिक्षित हैं. आपको इन मुद्दों को सुलझाना होगा.’ याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता (पति) वर्तमान में भारत में है और वह एक सितंबर को सिंगापुर लौटेगा. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकार्ता को निर्देश दिया कि वह अपने खिलाफ जारी अन्य आदेशों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण के लिए पांच लाख रुपये जमा कराए और मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर के लिए स्थगित कर दी.



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