यूएस-ईरान बातचीत से पहले एक्शन में पाकिस्तान, मिडिल ईस्ट की तरफ उड़ाए लड़ाकू विमान, किस चीज का खौफ?


US Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में शनिवार को होने जा रही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर जहां एक तरफ उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है. दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है, ऐसे में ईरान से हवाई मार्ग के जरिए आने वाले प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान अलर्ट पर है, खासकर इजरायल की संभावित गतिविधियों को देखते हुए.

पाकिस्तान ने सुरक्षा के मद्देनज़र अपने लड़ाकू विमान, C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, रिफ्यूलिंग टैंकर्स और AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को मिडिल ईस्ट दिशा में तैनात कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तैयारी इस्लामाबाद पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव को भी दर्शाती है, क्योंकि यह बैठक क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

एक्शन में पाकिस्तान

संभावित खतरों को देखते हुए इस्लामाबाद को लगभग एक किले में तब्दील कर दिया गया है. दक्षिणी और पश्चिमी एयरस्पेस में डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं. पाकिस्तान के मंत्री Mohsin Naqvi ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों की “फुल-प्रूफ सिक्योरिटी” सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं.

उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुका है, जहां अमेरिकी और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता होने वाली है. ईरान की ओर से इस वार्ता में संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi शामिल होंगे, जो इस बातचीत को और भी महत्वपूर्ण बना देता है.

छावनी बना इस्लामाबाद

खास बात यह है कि Iranian Revolution के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच इतनी बड़ी और हाई-लेवल आमने-सामने (face-to-face) बैठक होने जा रही है, जिससे इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है. यह बैठक सिर्फ कूटनीतिक पहल नहीं बल्कि पाकिस्तान के लिए एक बड़ी परीक्षा भी है, जहां उसकी सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय साख दोनों दांव पर हैं.

ईरान की एयरफोर्स को युद्ध में भारी नुकसान होने के बाद अब सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ गई हैं. ऐसे में पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में अपने लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, ताकि Persian Gulf और इस्लामाबाद पहुंच रहे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. पाकिस्तान की यह तैयारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अगर शांति वार्ता में किसी तरह की बाधा आती है या बातचीत पटरी से उतरती है, तो किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोका जा सके.

इसी बीच, पाकिस्तान और इजरायल के बीच हाल ही में बयानबाज़ी भी तेज हो गई थी. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने इजरायल को “शैतान” और “मानवता के लिए अभिशाप” तक कह दिया था, जिस पर इजरायल के पीएम Benjamin Netanyahu ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. हालांकि, बाद में ख्वाजा आसिफ ने अपना बयान वापस लेते हुए पोस्ट डिलीट कर दिया. ऐसे तनावपूर्ण माहौल के बीच पाकिस्तान ने ईरानी अधिकारियों की हवाई सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर संसाधन झोंक दिए हैं, जिससे साफ है कि वह इस शांति वार्ता को हर हाल में सफल बनाना चाहता है.

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