यूरोपीय यूनियन ने X पर लगाया 12 हजार करोड़ का जुर्माना, मस्क की कंपनी को लेकर अमेरिका और यूरोप आमने-सामने, ब्लू टिक कैसे बना वजह?



6 दिसंबर 2025 को यूरोप के बड़े-बड़े देश यानी यूरोपीय यूनियन ने एलन मस्क की कंपनी X पर बहुत बड़ा जुर्माना लगा दिया. यह जुर्माना करीब 12 करोड़ यूरो का है, यानी करीब 140 मिलियन डॉलर. अगर इसे भारतीय रुपयों में कन्वर्ट करें, तो करीब 12.59 हजार करोड़ रुपए होते हैं. यह पहली बार है जब यूरीपीय यूनियन ने अपना नया कानून डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) का इस्तेमाल करके किसी कंपनी को सजा दी है.

X का ब्लू चेकमार्क सिस्टम वजह बना
2022 में एलन मस्क ने ट्विटर को खरीद लिया था. उसके बाद उन्होंने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव किए. सबसे बड़ा ब्लू चेकमार्क सिस्टम का. पहले ये चेकमार्क सिर्फ मशहूर और ऑथेंटिक लोगों को मिलता था, लेकिन मस्क ने कहा कि अब कोई भी पैसे देकर ये बैज ले सकता है. यूरोपीय यूनियन को यह पसंद नहीं आया.

2023 में यूरोपीय यूनियन ने कहा, ‘यह तो धोखा है. लोग सोचेंगे कि जो अकाउंट ब्लू चेक वाला है, वो ऑथेंटिक है, लेकिन असल में कोई भी फर्जी आदमी पैसे देकर ये ले सकता है. इससे यूजर्स को ठगने वाले स्कैम, नकली अकाउंट्स और बुरे लोगों के जाल में फंसने का खतरा बढ़ जाता है.’

इसके अलावा, X ने विज्ञापनों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी और रिसर्चर्स को पब्लिक डेटा तक पहुंचने नहीं दिया. यूरोपीय यूनियन ने माना कि इससे पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) के नियम टूट रहे हैं तो उन्होंने जांच शुरू की. लेकिन एक साल से ज्यादा वक्त बीत गया, जांच रुकी-रुकी सी लग रही थी. आखिरकार, 6 दिसंबर 2025 को, यूरोपीय यूनियन ने चाबुक चलाकर जुर्माना ठोंक दिया.

ट्रंप सरकार के दखल से बड़ा बवाल
अमेरिका को यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ. अमेरिकी सरकार ने कहा, ‘यu हमारी कंपनियों पर हमला है. हम चुप नहीं बैठेंगे.’ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फौरन ट्वीट करते हुए लिखा, ‘ब्रुसेल्स (यूरोपीय यूनियन का हेडक्वार्टर), हमारी कंपनियों पर सेंसरशिप के बहाने हमला मत करो. यूरोपीय यूनियन को खुली बातचीत का साथ देना चाहिए, न कि अमेरिकी कंपनियों पर बकवास के नाम पर चोट पहुंचानी चाहिए.’

एलन मस्क ने यह पढ़ा और खुश होकर रिप्लाई दिया, ‘बहुत-बहुत शुक्रिया.’

अमेरिकी लोगों पर विदेशी सरकारों का हमला
फिर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने और सख्त लहजा अपनाया. उन्होंने कहा, ‘यह 140 मिलियन डॉलर का जुर्माना सिर्फ X पर नहीं, बल्कि सभी अमेरिकी टेक कंपनियों और अमेरिकी लोगों पर विदेशी सरकारों का हमला है. अब अमेरिकियों को ऑनलाइन सेंसर करने के दिन गए.’

 FCC चेयरमैन ब्रेंडन कार ने भी चिढ़कर लिखा, ‘यूरोप अमेरिकियों से टैक्स वसूलकर अपने ही सख्त नियमों से पिछड़े महाद्वीप को सब्सिडी दे रहा है. X इसलिए निशाने पर है क्योंकि यह एक सफल अमेरिकी टेक कंपनी है.’

यूरोपीय यूनियन ने सफाई दी
यूरोपीय यूनियन के टेक्नोलॉजी कमिश्नर हेन्ना विर्कुनन ने सफाई देते हुए कहा, ‘यह फैसला X की ट्रांसपेरेंसी से जुड़ा है. इसमें सेंसरशिप का कोई सवाल ही नहीं है.’ यूरोपीय यूनियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘यह धोखा यूजर्स को स्कैम्स, नकली लोगों के फ्रॉड और बुरे लोगों के जाल में फंसाता है.’

डिजिटल दुनिया के नियमों पर बड़ा टकराव
यह झगड़ा सिर्फ जुर्माने का नहीं है. यह दो महाद्वीपों के बीच डिजिटल दुनिया के नियमों पर बड़ा टकराव है. अमेरिका कहता है कि फ्री स्पीच सबसे ऊपर है, हमारी कंपनियों को परेशान मत करो. जबकि यूरोपीय यूनियन कहता है कि हम यूजर्स की सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी चाहते हैं. यह जुर्माना किसी बड़े तूफान की तरह लग रहा है.



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