रडार को चकमा, डिफेंस सिस्टम बेकार! ईरान की 5 मिसाइलें क्यों बन रही हैं महाशक्तियों का सिरदर्द?


Iran’s Missile: ईरान इस समय अपने सबसे नाज़ुक दौर से गुजर रहा है. देश के भीतर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, सुरक्षा बलों में असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं और सत्ता पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है. उन्होंने देश में सख्त कार्रवाई की जिम्मेदारी कुख्यात इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को सौंप दी है.

इसके साथ ही ईरान ने अपनी रहस्यमयी अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ को भी पूरी तरह एक्टिव कर दिया है. इसे सिर्फ आंतरिक हालात से निपटने की तैयारी नहीं, बल्कि बाहरी टकराव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. तो आइये जानते हैं कि ईरान के पास कौन-कौन सी खतरनाक मिसाइलें हैं. 

क्या है ईरान की ‘मिसाइल सिटी’

मिसाइल सिटी ईरान की सैन्य ताकत का सबसे खतरनाक चेहरा मानी जाती है. ये अंडरग्राउंड ठिकाने पहाड़ों के नीचे बने हुए हैं, जहां से बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें किसी भी वक्त लॉन्च की जा सकती हैं. 2026 के तनावपूर्ण हालात में इन ठिकानों को एक्टिव करना सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि खुली चेतावनी माना जा रहा है. अमेरिका, इजरायल और मध्य पूर्व के अन्य देश इसे ईरान का पावर शो बता रहे हैं.

खोर्रमशहर-4: सबसे खतरनाक मिसाइल

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सबसे घातक बैलिस्टिक मिसाइलों में खोर्रमशहर-4 को गिना जाता है. इसकी रेंज 2000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है और यह हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ती है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसका भारी वारहेड है, जो करीब 1500 किलो तक हो सकता है. 2025 में इसका सफल परीक्षण हुआ था. सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मिसाइल इजरायल के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है.

फतेह-2: हाइपरसोनिक रफ्तार

फतेह-2 को ईरान की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल कहा जाता है. इसकी रफ्तार मैक 15 तक बताई जाती है यानी बेहद तेज. इसकी रेंज करीब 1400 किलोमीटर है. इसकी गति इतनी ज्यादा है कि मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल माना जाता है. 2024 में इसके सफल परीक्षण के बाद अब इसे मिसाइल सिटी में तैनात कर दिया गया है.

सज्जील-2: दो मिनट में लॉन्च

सज्जील-2 एक दो-स्टेज सॉलिड फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी रेंज करीब 2500 किलोमीटर बताई जाती है. इसे लॉन्च करने में सिर्फ 2 मिनट लगते हैं, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया का मौका ही नहीं मिलता. इस मिसाइल को छिपाना आसान है और इसकी सटीकता भी काफी ज्यादा मानी जाती है. यह ईरान की रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा है.

शहाब-3: पुरानी लेकिन भरोसेमंद

शहाब-3 ईरान की सबसे पुरानी मिसाइलों में से एक है, लेकिन आज भी इसे बेहद भरोसेमंद माना जाता है. इसकी रेंज 1300 से 2000 किलोमीटर के बीच है और यह परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है. 1990 के दशक में तैनात की गई इस मिसाइल को समय-समय पर अपग्रेड किया गया है और यह अब भी ईरान की लंबी दूरी की मारक क्षमता की रीढ़ मानी जाती है.

जुल्फिकार: कम दूरी, ज्यादा सटीक

जुल्फिकार एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज करीब 700 किलोमीटर है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी जबरदस्त सटीकता है. इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जा सकता है और इसे खास तौर पर सऊदी अरब, यूएई और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.



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