‘रिटायरमेंट पर 20 ग्राम चांदी के सिक्के…’, भारतीय रेलवे ने लिया बड़ा फैसला, सुनकर चौंक जाएंगे आप


भारतीय रेलवे में 20 साल पुरानी एक खास परंपरा अब खत्म हो गई है. रेलवे अब अपने रिटायर होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को विदाई के उपहार के रूप में सोने की परत चढ़े चांदी के सिक्के नहीं देगा. यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है और रेलवे बोर्ड ने 28 जनवरी 2026 को इसका आधिकारिक आदेश जारी किया.

रिटायमेंट पर 20 ग्राम चांदी के सिक्के मिलते थे

यह परंपरा मार्च 2006 से चली आ रही थी, जिसमें रिटायरमेंट पर लगभग 20 ग्राम वजन के सोने मढ़े चांदी के सिक्के दिए जाते थे. यह सिक्का कर्मचारियों के लिए सम्मान और सेवा की याद का प्रतीक होता था. हजारों रेलवे कर्मचारियों को पिछले 20 सालों में ऐसे सिक्के मिल चुके हैं.

भोपाल मंडल में घोटाले की वजह से परंपरा बंद

इस परंपरा को रोकने की सबसे बड़ी वजह भोपाल मंडल का बड़ा घोटाला है. जांच में पता चला कि पश्चिम मध्य रेलवे (वेस्ट सेंट्रल रेलवे) के भोपाल में 2023 में इंदौर की एक कंपनी (M/s Viable Diamonds) से 3,640 सिक्कों का ऑर्डर दिया गया था. इनमें से 3,631 सिक्के सप्लाई हुए, लेकिन लैब टेस्ट में सामने आया कि ये सिक्के असल में तांबे के बने थे और इनमें चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23 प्रतिशत थी. बाकी हिस्सा तांबा था, जबकि नियम के मुताबिक इनमें 99.9% शुद्ध चांदी होनी चाहिए थी.

यह धोखाधड़ी तब पकड़ी गई जब कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों ने बढ़ती चांदी की कीमत पर इन सिक्कों को बेचने की कोशिश की, लेकिन जौहरियों ने बताया कि ये नकली हैं. इससे कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा क्योंकि जो सिक्का सम्मान का प्रतीक था, वो अपमान जैसा लगने लगा. रेलवे ने सप्लायर कंपनी के खिलाफ भोपाल में FIR दर्ज की, उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की और बाकी बचे सिक्कों को जब्त कर लिया. हर सिक्के में लगभग 2,200-2,500 रुपए की ठगी होने का अनुमान है, जिससे कुल घोटाला करोड़ों में हो सकता है.

मौजूदा स्टॉक वाले सिक्कों का क्या होगा?

रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने 28 जनवरी 2026 को जारी आदेश में साफ लिखा है कि ‘Discontinuation of practice of presenting Gold plated Silver Medals to retiring Railway officials’ यानी रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा बंद की जाती है. यह आदेश सभी जोन, प्रोडक्शन यूनिट्स और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स पर लागू है. मौजूदा स्टॉक वाले सिक्कों को अब अन्य कामों में इस्तेमाल किया जाएगा. यह फैसला 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होगा, यानी अब उन्हें यह सिक्का नहीं मिलेगा.



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