भारतीय वायुसेना फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट को लेकर डील करने वाली है. उसके बावजूद भारत की सबसे बड़ी टेंशन 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर है क्योंकि चीनी एयरफोर्स पहले से ही J-20 और J-35 जैसे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है. ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि चीन, पाकिस्तान के साथ 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को लेकर डील कर सकता है. भारत को 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए अमेरिका और रूस से ऑफर मिला है, हालांकि अब तक उसने न तो अमरीकी F-35 और न ही रूसी Su-57 को लेकर कोई हामी भरी है. इस बीच रूस की ओर से भारत को Su-57M1E के लिए ऐसा ऑफर दिया है, जिसे मना करना भारत के लिए आसान नहीं होगा.
रूस ने भारत को Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट का अपडेटेड वाला वर्जन ऑफर किया है. डिफेंस डॉट इन वेबसाइट के मुताबिक, ‘विंग्स इंडिया 2026’ प्रदर्शनी के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों की हाई लेवल की मीटिंग में रूस की ओर से डबल सीट वाले इस Su-57 को लेकर ऑफर दिया गया है. मॉस्को की ओर से दिए गए प्रस्ताव में फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड देना भी शामिल है, जिस तरह BrahMos और Astra मिसाइलों का दिया गया है. रूस की योजना है कि भारत फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) को फिर से पटरी पर लाया जाए, जिसमें दोनों देश मिलकर इसका उत्पादन करेंगे.
रूस के डबल सीटर फाइटर जेट की खासियत
खबरों के मुताबिक, रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने एक योजना का विस्तृत विवरण दिया है, जिसके तहत भारत को 5वीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट के महत्वपूर्ण सामानों का निर्माण घरेलू स्तर पर करने की अनुमति मिलेगी. इस प्रस्ताव में काफी महंगी टेक्नोलॉजी शामिल है, जैसे-
– अगली पीढ़ी के इंजन (विशेष रूप से Izdeliye 30 / AL-51F1)
– AESA रडार सिस्टम और अपडेटेड ऑप्टिकल सेंसर
– सोर्स कोड तक पहुंच, जिससे ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों जैसे स्वदेशी भारतीय हथियारों को एकीकृत करना संभव हो सकेगा
– कॉम्बैट ऑटोमेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
2018 में रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर हुआ था भारत
बता दें कि भारत ने साल 2018 में बढ़ती लागत, भारतीय इंजीनियरों को कम कार्य दिए जाने और फाइटर जेट की स्टेल्थ क्षमता और इंजन प्रदर्शन पर शक का हवाला देते हुए FGFA कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था. उसके बाद से ही भारतीय वायु सेना (IAF) ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को प्राथमिकता दी है. हालांकि AMCA प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2029 तक प्रस्तावित है और बड़े पैमाने पर उत्पादन 2030 के दशक के मध्य तक होने की उम्मीद नहीं है. ऐसे में रूस भारत की बढ़ती स्टेल्थ क्षमता की कमी को पूरा करने के लिए Su-57 को एक महत्वपूर्ण ‘स्ट्रैटजिक ब्रिज’ के रूप में पेश कर रहा है.
अमेरिका के F-35 से कितना अलग है रूसी जेट?
अमेरिका ने जिस F-35 फाइटर जेट का ऑफर भारत को दिया है, वो सिंगल सीटर है, जबकि रूस का ये फाइटर जेट डबल सीटर है, जिसके एक्सपर्ट्स Su-57M नाम दे सकते हैं. रूस का तर्क है कि आधुनिक मानव-मानवरहित टीमिंग (MUM-T) के लिए दूसरे चालक दल के सदस्य का होना आवश्यक है. पीछे की सीट पर बैठा ऑपरेटर मिशन कमांडर या ‘मिनी-AWACS’ के रूप में कार्य करता है. यह अधिकारी S-70 ओखोटनिक जैसे स्टेल्थ UCAV ड्रोनों के एक समूह का प्रबंधन करेगा, जबकि पायलट उड़ान संबंधी युद्धाभ्यास और वायु-से-वायु युद्धाभ्यास पर ध्यान केंद्रित करेगा.
IAF ने Su-57M1E में दिखाई दिलचस्पी!
रूसी डिफेंस इंडस्ट्री का कहना है कि इस डबल सीट वाले प्रोटोटाइप का एयरफ्रेम पहले से ही कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर विमान संयंत्र (KnAAZ) में असेंबल किया जा रहा है. भारतीय वायु सेना ने अपडेटेड Su-57M1E में नए सिरे से रुचि दिखाई है, हालांकि दिल्ली अभी भी सतर्क है. सूत्रों का कहना है कि भारतीय वायु सेना को मॉडर्न बनाए रखने के लिए कम से कम दो स्क्वाड्रन (40) फाइटर जेट की डील कर सकती है, लेकिन उसकी प्राथमिकता AMCA ही रहेगा. उसका पूरा फोकस रहेगा कि इस स्वदेशी प्रोजेक्ट पर किसी तरह का असर न पडे़.