इजरायल और ईरान के बीच जो जंग छिड़ी है, उसकी वजह से भारत को सबसे बड़ा डर कच्चे तेल की आपूर्ति का सता रहा है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार (28 मार्च, 2026) को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जलडमरूमध्य) को बंद करने का ऐलान किया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अरब मुल्कों के साथ भारत के तेल-गैस व्यापार का अहम गलियारा है, जहां से 22 फीसदी कच्चे तेल की भी आपूर्ति होती है, लेकिन अब इसके बंद होने से यह सप्लाई भी रुक सकती है.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मामले के जानकारों ने बताया है कि सरकार और तेल कंपनियां रूस से और ज्यादा तेल खरीदने पर विचार कर रही हैं. इस संकट की स्थिति में सरकार और तेल कंपनियां एक आकस्मिक रणनीति पर काम कर रही हैं. अगर पश्चिमी एशिया में तनाव के कारण खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुक जाती है, तो भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद फिर से बढ़ा सकता है. रूस से आने वाला तेल स्ट्रेट ऑफ हर्मुज के रास्ते पर भी निर्भर नहीं है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर और क्या कर सकता है भारत?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जैसा कहा है कि यह जंग चार हफ्ते के लिए खींच सकती है, तो ऐसे में भारत के सामने कच्चे तेल को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. ऐसे वक्त में भारत सरकार घरेलू खपत को सुरक्षित रखने के लिए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े कदम भी उठा सकती है. फिलहाल भारत पेट्रोल का एक तिहाई और डीजल का एक चौथाई हिस्सा निर्यात करता है.
कुछ महीनों में भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के चलते रूस से तेल की खरीद में कटौती की है. अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पेनल्टी के तौर पर लगाया था. हालांकि, पिछले महीने ही डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया था.
रूस से कितना तेल खरीदता है भारत?
कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, फरवरी में भारत ने रूस से 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन था. वहीं, इंडियन पोर्ट्स पर पिछले साल रूसी कच्चे तेल की लोडिंग एवरेज 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, जो इस साल सिर्फ 0.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई है.
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है, जिसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज कहते हैं. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है, जिसे विश्व स्तर सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांजिट मार्ग माना जाता है. सिर्फ ईरान ही नहीं, सऊदी अरब से कतर और कुवैत तक भारत को तेल और गैस की सप्लाई इसी मार्ग होती है.