बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के लंबे प्रवास के बाद 25 दिसंबर 2025 को ढाका लौट आए. वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं और BNP के डी-फैक्टो नेता माने जाते हैं. उनकी वापसी को 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले बहुत खास माना जा रहा है, क्योंकि BNP को चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिलने की संभावना दिख रही है.
जेल से रिहा होने के बाद लंदन चले गए थे तारिक
तारिक रहमान 2008 में इलाज के बहाने लंदन चले गए थे. उस समय राजनीतिक संकट के बीच उन्हें जेल से रिहा किया गया था. लंदन में रहते हुए उन्होंने पार्टी की कमान संभाली, ऑनलाइन मीटिंग्स और रैलियों के जरिए BNP को एकजुट रखा. 2009 से वे पार्टी के सीनियर उपाध्यक्ष और बाद में कार्यवाहक अध्यक्ष बने. उन्होंने वहां एक प्राइवेट PR कंपनी व्हाइट एंड ब्लू कंसल्टेंट्स लिमिटेड भी शुरू की.
मनी लॉन्ड्रिंग और हत्या की साजिश के आरोप लगे थे
शेख हसीना की सरकार के दौरान तारिक पर मनी लॉन्ड्रिंग और हत्या की साजिश जैसे कई गंभीर आरोप लगे थे. उन्हें अनुपस्थिति में सजा हुई, लेकिन हसीना की सरकार के हटने के बाद ये फैसले पलट गए और सारे केस खत्म हो गए. शेख हसीना को जुलाई 2025 में छात्रों के बड़े आंदोलन के बाद इस्तीफा देना पड़ा और वे भारत चली गईं. उसके बाद से BNP की स्थिति मजबूत हुई है.
तारिक के आने से BNP को क्या फायदा होगा?
अमेरिका की इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट की एक सर्वे के मुताबिक, BNP को संसद में सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं. तारिक रहमान को अगले प्रधानमंत्री के सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उनकी 80 वर्षीय मां खालिदा जिया बीमार हैं और ढाका के एक अस्पताल में भर्ती हैं. तारिक की वापसी का एक बड़ा कारण उनकी मां की तबीयत भी बताया जा रहा है.
बोगुरा-6 सीट से चुनाव लड़ेंगे तारिक
वापसी के बाद तारिक रहमान बड़े रैली में समर्थकों को संबोधित किया. वह अपनी मां से मिलेंगे और जल्द ही चुनाव प्रचार शुरू करेंगे. वे बोगुरा-6 सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं. उनका आना BNP को नई ताकत देगा और देश में राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जहां हाल के महीनों में हिंसा, अस्थिरता और अल्पसंख्यकों पर हमले जैसी घटनाएं बढ़ी हैं.
तारिक ने कहा कि बांग्लादेश सभी धर्मों के लोगों का है
तारिक ने रैली में जनता को संबोधित करते हुए कहा, ‘बांग्लादेश सभी धर्मों के लोगों का है. आज बांग्लादेश की जनता बोलने का अपना अधिकार वापस पाना चाहती है. अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश का निर्माण करें. यह देश पहाड़ों और मैदानों के लोगों का है, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का है. हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर महिला, पुरुष और बच्चा सुरक्षित रूप से घर से निकल सके और लौट सके.
पत्नी और बेटी के साथ बांग्लादेश आए तारिक
60 साल के तारिक रहमान अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जैमा रहमान के साथ लंदन से बांग्लादेश पहुंचे. एयरपोर्ट पर BNP के वरिष्ठ नेता, स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य और सेक्रेटरी जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने उन्हें रिसीव किया. कड़ी सुरक्षा के बीच वे वहां से निकले और 300 फीट रोड (पुर्बाचल) में एक बड़े स्वागत समारोह के लिए रवाना हुए. जहां लाखों समर्थकों ने उनका स्वागत किया.
शेख हसीना की कट्टर विरोधी रहीं खालिदा
बांग्लादेश की राजनीति दो नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जिसमें एक अवामी लीग की नेता शेख हसीना थी और दूसरी BNP की खालिदा जिया. 1980 के दशक में बांग्लादेश में सैन्य शासन था. तब सैन्य शासन के खिलाफ हसीना और खालिदा सड़क पर साथ-साथ आंदोलन करती थीं. 1991 में खालिदा जिया के चुनाव जीतने के बाद खालिदा और शेख हसीना के बीच राजनीतिक दुश्मनी बढ़ गई. 1990 के बाद बांग्लादेश में जब भी चुनाव हुए, सत्ता या तो खालिदा जिया के पास गई या शेख हसीना के पास. मीडिया इसे ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ यानी दो बेगमों की लड़ाई नाम देती है.