श्रीलंका में साइक्लोन से कैंसिल हुई एअर इंडिया की फ्लाइट, एयरलाइन ने यात्रियों को रिफंड देने से किया इनकार



श्रीलंका में आए भीषण साइक्लोन दित्वा (Cyclone Ditwah) ने एक दिसंबर को कई उड़ानों को प्रभावित कर दिया. इसी तूफ़ान की वजह से दिल्ली से कोलंबो जाने वाली एक IndiGo फ्लाइट को भी रद्द करना पड़ा, जिससे एक यात्री की यात्रा पूरी नहीं हो पाई. वह श्रीलंका पहुंच ही नहीं सका. ऐसे में 9 दिसंबर की Air India की कोलंबो–दिल्ली वापसी फ्लाइट लेना भी असंभव हो गया. यह साफ़ तौर पर एक मजबूरी में हुई कैंसलेशन थी, जिसका कारण ना यात्री था और ना उसकी मर्ज़ी.

‘यात्री बोले यह वॉलेंटेरी कैंसिलेशन नहीं है’

यात्री ने Air India को लिखकर बताया कि यह voluntary cancellation नहीं है. उन्होंने DGCA के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब यात्रा का एक हिस्सा प्राकृतिक आपदा या uncontrollable reasons से रद्द हो जाए, तो पूरी यात्रा “involuntary cancellation” मानी जाती है और ऐसे मामलों में एयरलाइन को फुल रिफंड या फ्री बदलाव देना चाहिए.

एयरलाइन का रिफंड से साफ इनकार

उन्होंने यह भी बताया कि श्रीलंका में सड़कें बंद थीं, बाढ़ और लैंडस्लाइड जारी थे, सुरक्षा एडवाइजरी लागू थी और साथ में 79 साल के बुज़ुर्ग भी थे, यानी यात्रा करना पूरी तरह असंभव और असुरक्षित था. लेकिन हैरानी की बात यह है कि Air India ने इस पूरी स्थिति को लगभग नज़रअंदाज़ कर दिया. एयरलाइन ने एक स्टैंडर्ड मेल भेजा जिसमें कहा गया कि रिफंड नहीं दिया जाएगा.

जवाब में यह भी लिखा था कि सिर्फ एक बार तारीख बदलने की छूट दी जा सकती है,  वह भी उन्हीं टिकटों पर जो 28 नवंबर तक बुक हुए हों और 5 दिसंबर तक यात्रा निर्धारित हो. यानी न परिस्थिति देखी गई  न प्राकृतिक आपदा का असर और न DGCA के नियमों पर विचार किया गया. कई यात्रियों के मन में यही सवाल उठ रहा है—जब यात्रा शुरू ही नहीं हो पाई, तो रिफंड से इनकार क्यों? 

प्राकृतिक आपदा से टूटी यात्रा का बोझ आखिर किस पर पड़ेगा?
यात्री पर, या एयरलाइन पर? इस मामले में Air India का जवाब यही संकेत देता है कि नुकसान चाहे किसी वजह से हुआ हो, भरपाई यात्री को ही करनी होगी.



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