रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को करीब चार साल हो चुके हैं. जब 2022 में रूस ने हमला किया था, तब यूक्रेन के लोगों में जबरदस्त जोश और एकजुटता दिखाई दी थी. लाखों नागरिक देश की रक्षा के लिए सेना में शामिल हुए थे. हर घर से किसी न किसी ने मोर्चा संभाला था. उस समय ऐसा लग रहा था कि यूक्रेन का हर नागरिक एक सैनिक बन चुका है, लेकिन वक्त बीतने के साथ हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब यह जंग लोगों के लिए गर्व नहीं, बल्कि डर और मजबूरी का प्रतीक बन गई है.
अब जबरन कर रहे लोगों की भर्ती
ब्रिटिश अखबार The Sun की रिपोर्ट के अनुसार, जंग के शुरुआती महीनों में 10 लाख से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से यूक्रेनी सेना जॉइन की थी. लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा होता गया, लोगों का उत्साह ठंडा पड़ गया. कई लोग भर्ती से बचने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट तक खरीदने लगे ताकि उन्हें ‘अनफिट’ घोषित किया जा सके. सरकार ने जब भ्रष्टाचार पर सख्ती की, तब उसने मेडिकल कमिशन ही खत्म कर दिए. इसके बावजूद अब सेना को मजबूर होकर जबरन भर्ती करनी पड़ रही है.
सड़कों पर पकड़कर भर्ती किए जा रहे लोग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब यूक्रेन के कई शहरों में चेकपोइंट्स पर सेना के जवान खड़े रहते हैं. जो भी 18 से 60 साल का पुरुष वहां से गुजरता है, उसकी पहचान जांची जाती है. अगर वह भर्ती के दायरे में आता है, तो उसे सीधे रिक्रूटमेंट सेंटर भेज दिया जाता है. कई मामलों में सैनिक लोगों को जबरदस्ती मिनीबस में बिठाकर ले जाते हैं. यूक्रेन में इस प्रक्रिया को अब ‘बसिफिकेशन’ कहा जाने लगा है.
समाज में बढ़ रहा है असंतोष
अब यूक्रेनी समाज दो हिस्सों में बंट गया है. एक ओर वो लोग हैं जो मोर्चे पर लड़ रहे हैं, और दूसरी ओर वो जो शहरों में सामान्य जीवन जी रहे हैं. महिला अफसर यूलिया मिकितेंको कहती हैं, “जब मैं देखती हूं कि लोग अपने परिवार के साथ घूम रहे हैं, तो मुझे गुस्सा आता है. मेरे सैनिकों को ये आज़ादी नहीं मिलती.”
लाखों घायल, हजारों मौतें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 45,000 से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं और लगभग 3.8 लाख घायल हुए हैं. युद्ध की यह लंबी लड़ाई यूक्रेन के लोगों की हिम्मत को तोड़ चुकी है. अब सैनिकों की जरूरत तो है, पर लोग भर्ती से डरने लगे हैं. जो कभी देशभक्ति का प्रतीक था, वही अब लोगों के लिए एक थकाऊ और दर्दभरी मजबूरी बन गया है.
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