सद्दाम हुसैन, लादेन के बाद अब मादुरो… अमेरिका के ऑपरेशन से कई देशों में दहशत; वेनेजुएला में अब क्या होगा?


वेनेजुएला में शनिवार (3 जनवरी 2026) को ताबड़तोड़ हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली प्रतिक्रिया सामने आई. उन्होंने ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी अमेरिका के कब्जे में हैं और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है. एक मौजूदा राष्ट्रपति को उसकी अपनी राजधानी से अमेरिका ने कब्जा कर लिया, जो कि मौजूदा समय में शायद ही देखने को मिलती है. ट्रंप के कार्यकाल में हुए इस एक्शन की तुलना सद्दाम हुसैन और ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के अमेरिकी अभियानों से होने लगी है.

सद्दाम हुसैन, लादेन के बाद अब मादुरो

वरिष्ठ सुरक्षा विश्लेषकों ने मादुरो को वेनेजुएला से पकड़ने के दावे की तुलना सद्दाम हुसैन और ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के अमेरिकी अभियानों से की है, जिन्होंने पूरे क्षेत्रों का स्वरूप बदल दिया था. वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति ने मादुरो और उनकी पत्नी के जीवित होने के सबूत मांगे हैं. इस सब के बीच एक बड़ा सवाल ये भी है कि अगर मादुरो वाकई सत्ता से हट गए हैं तो वेनेजुएला और इस क्षेत्र के लिए आगे क्या होगा?

एक्सपर्ट का कहना है कि इसका सबसे ऐतिहासिक उदाहरण 1989 में पनामा के नेता मैनुअल नोरीगा को गिरफ्तार करने के लिए अमेरिका द्वारा चलाया गया अभियान है. मादुरो की तरह, नोरीगा ने भी विवादित चुनावों में जीत का दावा किया था. वाशिंगटन ने उन पर मादक पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाया था और उन्हें सत्ता से हटाने से पहले अमेरिका के भारी दबाव का सामना करना पड़ा था. 

मैनुअल नोरीगा और मादुरो का इतिहास एक जैसा: एक्सपर्ट

विश्लेषकों का कहना है कि इसका सबसे करीबी ऐतिहासिक उदाहरण 1989 में पनामा के नेता मैनुअल नोरीगा को गिरफ्तार करने के लिए अमेरिका द्वारा चलाया गया अभियान है. मादुरो की तरह, नोरीगा ने भी विवादित चुनावों में जीत का दावा किया था, वाशिंगटन ने उन पर मादक पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाया था और उन्हें सत्ता से हटाने से पहले अमेरिका के भारी दबाव का सामना करना पड़ा था. नोरीगा की गिरफ्तारी एक पारंपरिक युद्ध के बाद हुई जिसमें पनामा की सेनाएं जल्द ही हार हुई थी.

इस बार अमेरिका के तरीके में जबरदस्त अंतर दिखाई दिया है. बीबीसी के एक्सपर्ट के अनुसार, जमीनी आक्रमण के बिना कराकस से मौजूदा राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को निकालना, नोरीगा की गिरफ्तारी की तुलना बड़ा अभियान साबित होगा. अमेरिका की ओर से किसी देश की राजधानी में इस तरह की सटीक कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जो सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील होते हैं.

सीएनएन में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के चीफ निक पैटन वॉल्श ने अमेरिकी की यह कार्रवाई ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अभियान और सद्दाम हुसैन की गिरफ्तारी की याद दिलाता है. उन्होंने इसे ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल का सबसे जबरदस्त विदेशी सैन्य हस्तक्षेप बताया और कहा कि इससे राष्ट्रपति ट्रंप जिस हद तक वैश्विक स्तर पर काम करने की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं, वह नजर आता है.

यूएस अटॉर्नी जनरल बोंडी ने कहा, ‘निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी, सिलिया फ्लोरेस पर न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में मुकदमा दायर किया गया है. मादुरो पर मादक पदार्थों से संबंधित आतंकवाद की साजिश (नारको-टेररिज्म), कोकीन आयात की साजिश, मशीनगन और विनाशकारी उपकरणों के कब्जे और संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ मशीनगन और विनाशकारी उपकरणों के कब्जे की साजिश का आरोप लगाया गया है. उन्हें जल्द ही अमेरिकी अदालतों में न्याय का सामना करना पड़ेगा.’

वेनेजुएला के लिए आगे क्या होगा? 

अगर मादुरो को जबरन सत्ता से हटाया गया है तो वेनेजुएला के भीतर इसके परिणाम अनिश्चित हैं. अमेरिकी हस्तक्षेप के समर्थकों का तर्क है कि इससे लोकतांत्रिक परिवर्तन का मार्ग खुलेगा, जिससे मारिया कोरिना मचाडो या विवादित 2024 चुनाव के विपक्षी उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज जैसे विपक्षी नेताओं को सत्ता संभालने का अवसर मिल सकता है.

आपराधिक गिरोह, कोलंबियाई गुरिल्ला समूह और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क देश के बड़े हिस्से में सक्रिय हैं. मादुरो के न होने पर भी ये रातोंरात गायब नहीं होंगी. सबसे संभावित परिणाम न तो तत्काल लोकतंत्र है और न ही गृहयुद्ध, बल्कि अस्थिरता, सत्ता संघर्ष और सैन्य अभिजात वर्ग के साथ वार्ता है.



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