‘सफेद बूट्स, आंखों पर काला चश्मा, और बर्फीली पहाड़ियों पर एक टक निगरानी…’, गणतंत्र दिवस की परेड में नजर आएंगे व्हाइट सोलजर्स


इस वर्ष गणंतत्र दिवस परेड में सेना की एक ऐसी टुकड़ी कदमताल करती दिखेगी, जिसकी यूनिफॉर्म ओलिव के बजाए बिल्कुल व्हाइट यानी सफेद है. ये है सियाचिन जैसे बर्फीले इलाकों में तैनात भारतीय सेना के स्काउट्स रेजिमेंट का मिला-जुला दस्ता. भारतीय सेना की छह स्कॉउट्स रेजिमेंट के सैनिक इस वर्ष कर्तव्य पथ पर मार्च करते दिखाए पड़ेंगे. इनमें अरूणाचल, लद्दाख, सिक्किम, डोगरा, कुमाऊं और गढ़वाल स्कॉउट्स के सैनिक शामिल हैं. सन ऑफ द सोएल थीम पर आधारित इन स्कॉउट्स रेजिमेंट को माउंटेन-वॉरफेयर यानी ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में लड़ने में महारत हासिल है.

कहां तैनात किया जाता है इन व्हाइट सोल्जर्स को? 
इन व्हाइट सोल्जरर्स को सियाचिन, सिक्किम, उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में तैनात किया जाता है. स्कॉउट्स के सैनिक, जंग के मैदान की रेकी यानी जानकारी इकठ्ठा करने से लेकर खतरों से आगह करते हैं. उसके बाद इन्फ्रेंटी सैनिक आगे बढ़ते हैं. शुक्रवार को कर्तव्य पथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल में हिस्सा लेने के बाद स्कॉउट्स दस्ते के कमांडर,लेफ्टिनेंट अमित चौधरी से एबीपी न्यूज ने खास बात की.

रेजिमेंट में तैनात लेफ्टिनेंट ने क्या बताया?
जम्मू के रहने वाले लेफ्टिनेंट अमित, असम रेजिमेंट से ताल्लुक रखते हैं और इन दिनों अरूणाचल स्कॉउट्स का हिस्सा हैं. उन्होंने बताया कि हाई ऑल्टिट्यूड क्षेत्रों में चारों तरफ बर्फ रहती है. ऐसे में वे भी बर्फ के समान सफेद रंग की बेहद खास यूनिफॉर्म पहनते हैं. इन सैनिकों के बूट्स भी बिल्कुल सफेद होते हैं. आंखों में खास गोग्लस यानी काला चश्मा होता है.

उल्लेखनीय है कि लेफ्टिनेंट अमित, इस वर्ष परेड में हिस्सा लेने वाले सबसे युवा कमांडर है. महज एक वर्ष पहले, लेफ्टिनेंट अमित ने सेना में कमीशन लिया था. टीवी पर परेड देखकर बड़े हुए लेफ्टिनेंट अमित के पिता भी सेना में सूबेदार मेजर के पद से रिटायर हुए थे. वर्ष 1990 में उनके पिता ने भी गणतंत्र दिवस परेड में अपनी रेजिमेंट (द गार्ड्स) की तरफ से हिस्सा लिया था.   



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