सबरीमाला सोना चोरी मामले में साजिश की होगी जांच, केरल हाईकोर्ट ने SIT का दायरा बढ़ाया



केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला मंदिर से सोना गायब होने के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश का दायरा बढ़ाते हुए जांचकर्ताओं को संभावित व्यापक षड्यंत्र और त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल का निर्देश दिया.

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की बेंच ने यह आदेश जारी किया. इससे पहले एसआईटी ने मंगलवार (21 अक्टूबर, 2025) को वकीलों की गैरमौजूदगी में बंद कमरे में कार्यवाही के दौरान सीलबंद लिफाफे में अपनी पहली रिपोर्ट दाखिल की. ​​

अदालत की ओर से इस महीने की शुरुआत में गठित एसआईटी द्वारपालकों की मूर्ति पर चढ़ी सोने की परत से सोने की कथित चोरी की जांच कर रही है. अदालत ने कहा कि द्वारपालकों की मूर्तियों और उनके ऊपर सोने की परत को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.

जजों ने कहा कि अदालत ने मामले की निगरानी जांच के तरीके या पद्धति को निर्देशित करने या आदेश देने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए की थी कि यह उचित, प्रभावी और वैध तरीके से आगे बढ़े. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जांच की निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा में जनता का विश्वास बनाए रखना और उसे सुदृढ़ करना था.

एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, दो मामले दर्ज किए गए हैं. पहला मामला जुलाई 2019 में बेंगलुरु निवासी उन्नीकृष्णन पोट्टी को सोने से मढ़े द्वारपालकों की मूर्तियां और पीडम कथित रूप से अनियमित रूप से सौंपे जाने से संबंधित है. दूसरा मामला साइड फ्रेम से निकाले गए 409 ग्राम सोने को अपने पास रखने से संबंधित है, जिसे पोट्टी ने कथित तौर पर देवस्वओम अधिकारियों की जानकारी में रखा था.

कोर्ट ने पोट्टी की ओर से टीडीबी को भेजे गए एक ईमेल का उल्लेख किया जिसमें सोने के एक हिस्से का उपयोग अपनी एक परिचित लड़की की शादी के लिए करने की अनुमति मांगी गई थी. बेंच ने कहा कि इस तरह का आचरण जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ‘जानबूझकर चुप्पी और छिपाव’ को दर्शाता है.

घटनाओं की शृंखला को ‘एक बड़ी और सुनियोजित योजना का हिस्सा’ बताते हुए, न्यायाधीशों ने एसआईटी को 2019 और 2025 के लेन-देन के पीछे संभावित साजिश की जांच करने का निर्देश दिया.

आदेश में कहा गया है कि मंदिर के कीमती सामानों की मरम्मत का काम सन्निधानम (मंदिर परिसर) के भीतर ही किए जाने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, अधिकारियों ने इस नियम की ‘अनदेखी’ की और पवित्र वस्तुओं को पोट्टी को सौंप दिया, जिसका ‘संदिग्ध इतिहास’ था.

उन्होंने एसआईटी को टीडीबी की कार्यवृत्त पुस्तिका, सभी संबंधित रजिस्टरों और दस्तावेजों को जब्त कर सुरक्षित रखने और उसकी प्रतियां महापंजीयक को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया. अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है, जब एसआईटी का नेतृत्व करने वाले अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होंगे. कार्यवाही बंद कमरे में जारी रहेगी.

अदालत के सूत्रों ने कहा कि एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट में उसकी जांच की वर्तमान स्थिति का विवरण दिया गया है, जिसके छह सप्ताह के भीतर पूरा होने की उम्मीद है. उन्नीकृष्णन पोट्टी और कई टीडीबी अधिकारियों सहित दस लोगों को दोनों मामलों में आरोपी बनाया गया है.

पोट्टी ने 2019 में द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल चौखटों पर सोने की परत चढ़ाने का काम प्रायोजित किया था. उन्हें पहले पवित्र आभूषणों से सोना गायब होने के खुलासे के बाद गिरफ्तार किया गया था.



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