‘हमने अपने बारे में तैयार फेक वीडियो को देखा है…’, जानिए किस मामले में चीफ जस्टिस ने ऐसा कहा?



सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए नकली वीडियो बनाए जाने की जानकारी है. चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई (CJI BR Gavai) ने कहा है कि उन्होंने और उनके साथी जज जस्टिस विनोद चंद्रन ने अपने बारे में भी बने फर्जी वीडियो को देखा है. कोर्ट में यह चर्चा उस याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई जिसमें न्यायपालिका में एआई के उपयोग को लेकर उचित नियम बनाए जाने की मांग की गई है.

माना जा रहा है कि चीफ जस्टिस अपनी तरफ जूता फेंके जाने के नकली वीडियो के बारे में ऐसा कह रहे थे. ध्यान रहे कि 6 अक्टूबर 2025 की सुबह लगभग 11:35 बजे एक वकील ने अपना जूता मुख्य न्यायाधीश की तरफ फेंका था, जो उन तक नहीं पहुंचा. इस घटना का कोई स्पष्ट वीडियो नहीं था, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर एक फर्जी वीडियो प्रसारित हुआ जिसमें जूता चीफ जस्टिस के बगल से गुजरता हुआ दिखा.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को 2 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लगाने को कहा है. इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे चीफ जस्टिस गवई ने संकेत दिया कि वह इस मामले को नहीं सुनना चाहते. उन्होंने याचिकाकर्ता कार्तिकेय रावल के लिए पेश वकील से पूछा, ‘आप क्या चाहते हैं. मैं याचिका खारिज कर दूं या इसे 2 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लगाया जाए?’

याचिका में कहा गया है कि अब अदालतें खुद भी AI का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन यह उपयोग सकारात्मक कार्यों के लिए हो रहा है. कोर्ट को AI के खतरों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए. जनरेटिव एआई उपलब्ध आंकड़ों की खुद समीक्षा कर निष्कर्ष निकालता है. इस तकनीक से गलत या भ्रामक जानकारी मिलने का अंदेशा है. इसके जरिए उपलब्ध जानकारी में पारदर्शिता का अभाव है और यह पक्षपात से भरी हो सकती है.

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कोर्ट एआई तकनीक के इस्तेमाल के लिए दिशानिर्देश तय करे ताकि न्यायिक प्रक्रिया में गलत या भ्रामक एआई सामग्री का असर न पड़े. याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालती कार्यवाही के मॉर्फ किए गए वीडियो न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जनता में गलत धारणा पैदा कर सकते हैं.



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