बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सुनाई गई फांसी की सजा पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने खेद व्यक्त किया है. हालांकि, यूएन का कहना है कि बांग्लादेशी कोर्ट का यह फैसला पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुतेरस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार (17 नवंबर, 2025) को यहां डेली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एंटोनिया गुतेरस संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के इस रुख से पूरी तरह सहमत हैं कि हम किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड के इस्तेमाल के खिलाफ हैं.
स्टीफन दुजारिक से शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में सुनाई गई मौत की सजा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की प्रतिक्रिया के बारे में सवाल किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने यह बात कही है. शेख हसीना पर आरोप लगाया गया है कि पिछले साल बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर सुरक्षाबलों ने ड्रोन और हेलीकॉप्टरों से गोलीबारी की.
अगस्त, 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद अंतरिम पीएम मोहम्मद यूनुस ने उनके कार्यकाल के दौरान अत्याचारों की समीक्षा के लिए विशेष न्यायाधिकरण का गठन किया था. जस्टिस गुलाम मुर्तजा मोजुमदार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने सोमवार को 453 पेज के फैसले में शेख हसीना को उकसावे, हत्या का आदेश देने और अपराधों को रोकने में विफलता का दोषी करार दिया है.
पिछले साल पांच अगस्त को बांग्लादेश में अपनी सरकार गिरने के बाद से भारत में रह रहीं शेख हसीना को न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है. शेख हसीना के सहयोगी और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इसी तरह के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई है.
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने एक बयान में कहा कि शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ न्यायाधिकरण की ओर से सुनाया गया फैसला पिछले साल विरोध प्रदर्शनों के दमन के दौरान किए गए गंभीर उल्लंघनों के पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है. उन्होंने कहा, ‘हमें मृत्युदंड लागू करने पर भी खेद है, जिसका हम सभी परिस्थितियों में विरोध करते हैं.