हार्ट अटैक से हुई मौत, अस्पताल ने नहीं दिया स्ट्रेचर, कंधों पर उठाना पड़ा शव… तेलंगाना में दिखा दर्दनाक मंजर


तेलंगाना के वारंगल स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल में बीते दिन यानी शुक्रवार को एक ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की दावेदारियों को तार-तार कर दिया. खम्मम जिले के रहने वाले कांता राव की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. 

मृत्यु के बाद अस्पताल के स्टाफ ने इतना निर्दयी रवैया अपनाया कि उन्होंने शव को बाहर निकालने के लिए न तो मदद की और न ही स्ट्रेचर (स्ट्रेचर) उपलब्ध कराया. मजबूर परिजनों को आखिरकार अपने प्रियजन का शव अपने कंधों पर उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ा.

खम्मम निवासी कांता राव को गंभीर हार्ट अटैक आने के बाद परिवार के सदस्यों ने तुरंत एमजीएम अस्पताल पहुंचाया. हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. मौत का गम झेल रहे परिवार के लिए असली सदमा तो इसके बाद हुआ. जब परिजनों ने शव को मॉर्चुअरी से बाहर एंबुलेंस तक ले जाने के लिए अस्पताल के स्टाफ से स्ट्रेचर की मांग की, तो उन्हें ठुकरा दिया गया.

क्या है पूरा मामला?

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि अस्पताल कर्मचारियों ने यह कहते हुए मदद करने से साफ इनकार कर दिया कि यह उनका काम नहीं है. नतीजतन, परिवार के सदस्यों को कोई चारा नहीं दिखा और उन्हें शव को हाथों में उठाकर, बिना किसी सहारे के, अस्पताल के गलियारों से होते हुए बाहर पार्किंग तक ले जाना पड़ा. 

इस दौरान अस्पताल में तैनात कोई भी अधिकारी या कर्मचारी आगे नहीं आया. एक तरफ जहां सरकारें ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं की बात करती हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ ऐसा बर्ताव सवाल खड़े करता है.

तेलंगाना के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

तेलंगाना के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में अक्सर बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्टाफ के रुखे व्यवहार की शिकायतें सामने आती रहती हैं. खासकर जिला अस्पतालों में, जहां भीड़ ज्यादा होती है, वहां स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की किल्लत आम बात है. हालांकि, एमजीएम जैसे बड़े संस्थान में किसी मृत व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अमानवीय है, बल्कि यह मेडिकल एथिक्स (Medical Ethics) के भी खिलाफ है. पिछले कुछ वर्षों में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मरीजों को स्ट्रेचर पर फर्श पर घसीटना पड़ा, लेकिन मृतक के शव के साथ ऐसा सलूक सामाजिक तौर पर अनर्थकारी है.



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