हैदराबाद मेट्रो विवाद: L&T की वापसी पर भड़के केटीआर, कहा- ‘CM रेवंत रेड्डी की तानाशाही से हटी कंपनी’



बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर हैदराबाद मेट्रो परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. केटीआर ने कहा कि सीएम के ‘अहंकार और एकतरफा तानाशाही रवैये’ के कारण एल एंड टी कंपनी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी ने परियोजना से हटने का फैसला किया. 

उन्होंने मांग की है कि रेवंत रेड्डी स्पष्ट करें कि 2070 तक की लीज अवधि के बावजूद एल एंड टी क्यों चली गई. तेलंगाना भवन में मीडिया से बातचीत में केटीआर ने कहा कि एल एंड टी का हैदराबाद से बाहर जाना राज्य के लिए ‘अमिट धब्बा’ है. उन्होंने दावा किया कि रेवंत सरकार ने ‘गैर-जिम्मेदाराना और विचारहीन’ तरीके से महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिसे कुछ मीडिया ने गलत तरीके से महिमामंडित किया. 

मेट्रो कार्य परियोजना में लाई तेजी

केटीआर ने 2008 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करने की बात याद दिलाई. उस समय मेटास कंपनी ने टेंडर जीता था, लेकिन बाद में एल एंड टी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई.

केटीआर ने बताया कि 2014 में बीआरएस सरकार के सत्ता में आने तक मेट्रो कार्य केवल 25% पूरा हुआ था. केसीआर सरकार ने इसे तेजी से पूरा करने का बीड़ा उठाया और 2017 में पहला चरण शुरू किया गया. कोविड संकट के दौरान भी सरकार ने एल एंड टी को 900 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण देकर समर्थन किया. 

सीएम रेवंत रेड्डी पर केटीआर का आरोप

इसके अलावा, मेट्रो को हाईटेक सिटी से रायडुर्ग तक विस्तारित किया गया और 69 किलोमीटर का नेटवर्क पूरा किया गया. केटीआर ने यह भी कहा कि बीआरएस सरकार ने शमशाबाद हवाई अड्डे तक मेट्रो विस्तार की योजना बनाई थी, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी. 

हालांकि, रेवंत सरकार ने सत्ता में आते ही इस परियोजना को रद्द कर दिया, जिसे केटीआर ने ‘अविवेकपूर्ण’ करार दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसले निवेशकों के भरोसे को कमजोर करते हैं और तेलंगाना की प्रगति को नुकसान पहुंचाते हैं.

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