होर्मुज बंद हो तो इन दो रास्तों से भी निकल सकते हैं तेल और गैस के जहाज, जानिए यहां ईरान का कितना कंट्रोल?


अमेरिका, इजरायल और ईरान की जंग के 17 दिन बाद आज दुनिया एक ऐसे ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है जो पहले कभी नहीं आया.  तेल से लेकर एलपीजी आपूर्ति का मुख्य रास्ता था-  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उस  पर टैंकर ट्रैफिक लगभग शून्य हो चुका है. करीब 400 जहाज गल्फ ऑफ ओमान के बाहर लंगर डाले खड़े हैं आगे जाने की हिम्मत नहीं है.

ईरान ने इसी को अपना सबसे बड़ा हथियार बना के रखा है, लेकिन अपने इस हथियार के साथ उसकी रणनीति और भी आगे की है. समझते हैं कि ईरान ने कैसे  एक-एक करके हर वो रास्ता बंद करने का प्लान  बनाया हुआ है जिससे दुनिया तक तेल पहुंचता है? 

पहला रास्ता बंद- होर्मुज, यह ईरान और ओमान के बीच महज 33 किलोमीटर चौड़ा रास्ता है और इसी से रोजाना 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो है दुनिया की कुल तेल खपत का 20 प्रतिशत. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, कुवैत, कतर सबका तेल इसी एक रास्ते से जाता है.

इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 2 मार्च को आधिकारिक ऐलान किया कि होर्मुज अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बंद है. जो जहाज गुजरने की कोशिश करे उस पर हमला होगा और ऐसा हुआ भी- UKMTO के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक 17 सिविलियन जहाजों पर हमले हो चुके हैं.

होर्मुज बंद होने के बाद सबने सोचा बाईपास रूट्स तो हैं- उसका  इस्तेमाल करेंगे, लेकिन ईरान ने उसकी भी प्लानिंग कर रखी है. दूसरा रास्ता- फुजैरा… ऐसी जंग के खतरों को भांपते हुए यूएई ने 2012 में 4.2 बिलियन डॉलर खर्च करके एक पाइपलाइन बनाई थी, ADCOP (हबशान से फुजैरा तक) 380 किलोमीटर लंबी.

यह यूएई की इंश्योरेंस पॉलिसी थी कि होर्मुज बंद हो तो फुजैरा से तेल निकलेगा जो हिंद महासागर से सीधे जुड़ा है. इसकी क्षमता 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन है और ईरान ने वो एग्जिट भी बंद कर दिया है. ईरानी ड्रोन्स ने फुजैरा के ऑयल टर्मिनल पर हमला किया  और बस आग लगी, धुआं उठा, ऑयल लोडिंग बंद और शिपिंग कंपनी Maersk ने फुजैरा पर सभी ऑपरेशंस बंद कर दिए. इस तरह दूसरा विकल्प भी बंद. 

तीसरा रास्ता- होर्मुज और फुजैरा के बाद बचा यानबू और बाब-अल-मंदब. सऊदी अरब के पास एक और रास्ता था ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का. अबकाइक से यानबू तक 1,200 किलोमीटर लंबी ये पाइप लाइन है. इसकी डिजाइन कपैसिटी 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन है. होर्मुज बंद होते ही सऊदी अरब ने यही रास्ता एक्टिवेट किया. यानबू से लाल सागर में तेल भेजना शुरू लेकिन लाल सागर से बाहर निकलने के लिए बाब-अल-मंदब से गुजरना पड़ता है और यहीं हूती बैठे हैं. 

बाब-अल-मंदब पर ‘Hour Zero’ का ऐलान
यमन और जिबूती के बीच सिर्फ 30 किलोमीटर चौड़ा बाब-अल-मंदब लाल सागल को गल्फ ऑफ एडेन से जोड़ता है, जो Suez Canal का एकमात्र दरवाजा है. यह दुनिया के 10 से 12 प्रतिशत इंटरनेशनल मैरिटइम ट्रेड का रास्ता है. हूती के हमलों की वजह से यहां से तेल का बहाव साल 2023 के 8.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन से गिरकर 2025 में 4.2 मिलियम बैरल प्रतिदिन रह गया था. यह रास्ता पहले से ही आधा बंद था.

14 मार्च 2026 को हूती अधिकारियों ने ईरान के साथ मिलिट्री अलाइनमेंट का ऐलान किया और ‘Hour Zero’ की घोषणा कर दी. हूतियों ने साफ कहा कि बाब-अल-मंदब बंद करना उनकी प्राथमिकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है जैसे ही सऊदी अरब ने लाल सागर से डिलीवरी शुरू की हूती उस रास्ते को भी बंद करने के लिए तैयार हो गए. यह ईरान की तीन-चरणीय रणनीति का हिस्सा ही है.

अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदब दोनों एक साथ पूरी तरह बंद हो जाएं तो दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का 30 प्रतिशत एक झटके में ठप हो सकता है. Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि बाब-अल-मंदब पर हूती के कब्जे से तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है, जबकि अभी तेल 110 डॉलर पार कर चुका है और WTI जो 2025 की शुरुआत में 57 डॉलर था, वो 119 डॉलर तक पहुंच चुका है.

जो जहाज नहीं गुज़र सकते उन्हें अफ्रीका के Cape of Good Hope का चक्कर लगाना होगा. यहां से जाने के लिए 12 से 15 दिन का अतिरिक्त ईंधन चाहिए. शिपिंग कंपनियां मैदान छोड़ चुकी हैं. CMA CGM, Maersk और Hapag-Lloyd जैसी कंपनियां बाब-अल-मंदब से सभी trans-Suez सर्विसेज बंद कर चुकी हैं. इंश्योरेंस कंपनियों ने वॉर रिस्क कवर या तो बंद कर दिया है या इतना महंगा कर दिया है कि कोई भी कमर्शियल ऑपरेटर इन रास्तों पर जाने की हिम्मत नहीं कर रहा.

भारत पर क्या है इसका असर? 
भारत अपनी जरूरत का 88-89 प्रतिशत कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. होर्मुज से गुजरने वाले तेल का 84 प्रतिशत हिस्सा एशियन मार्केट चीन, भारत, जापान, साउथ कोरिया की तरफ जाता है. अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदब दोनों लंबे समय तक बंद रहे तो पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, हवाई किराया सब सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे.

 

यह भी पढ़ें:-
Israel-Iran War: जंग खत्म करना चाहते हैं अमेरिका और ईरान? हमलों के बीच अराघची और ट्रंप के दूत में पहली बार हुई बात



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *