’12 बार जीत का दावा, अमेरिका पर बढ़ता आर्थिक कर्ज..’, ट्रंप ईरान से युद्ध में अगले तीन हफ्तों में क्या हासिल करना चाहते हैं?


मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अपने पांचवे हफ्ते से गुजर रही है. इतने कम वक्त में ही इस युद्ध का असर दुनिया के देशों पर देखने को मिला है. एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अलग-अलग भाषणों में 12 बार जीत का दावा किया है. 

ट्रंप ने कहा है कि लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उन्हें ईरान में सैन्य अभियान के लिए तीन और हफ्तों की जरूरत है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ट्रंप अगले तीन हफ्तों में किन लक्ष्यों को हासिल करने की बात कर रहे हैं, जो पिछले एक महीने में हासिल नहीं कर पाए. आइए समझते हैं. 

अमेरिका को इस युद्ध में नुकसान के सिवा कुछ नहीं मिला
अमेरिका को इस युद्ध में लगातार नुकसान झेलना पड़ रहा है. पेंटागन और ट्रंप ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से कम से कम 13 अमेरिकी नागरिक इस युद्ध में मारे गए हैं. लगभग 350 घायल हुए हैं. कई जगह माना जा रहा है कि अमेरिका के 15 सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं. 

इसके अलावा ईरान की मिसाइलों और ड्रोन अटैक ने अमेरिका की 1.4 अरब डॉलर से लेकर 2.9 अरब डॉलर तक अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है. कई मौके पर उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया है. इनमें F-15E लड़ाकू विमान फ्रेंडली फायर में ही नष्ट हो गया. वहीं F-35 को इमरजेंसी लैंडिंग कराना पड़ी है. अब यह युद्ध एक थका देने वाले युद्ध में तब्दील हो गया है. 

अमेरिका में ट्रंप का विरोध और आगामी मध्यावधि चुनाव सबसे बड़ी चिंता? 

इधर ट्रंप का विरोध भी अमेरिका में देखने को मिला है. आने वाले समय में ट्रंप को अपने ही देश में मध्यावधि चुनावों का सामना करना पड़ रहा है. इसमें गैसोलीन की कीमतें लगातार बढ़ रही है. यहां गैसोलीन की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर चली गई है. ईरान युद्ध में एक डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. कैलिफोर्निया से लेकर पेंसिल्वेनिया तक पेट्रोल पंप के ड्राइवर भी ट्रंप से नाराज हैं. ट्रक ड्राइवर गाड़ी चलाने से परहेज कर रहे, तो वहीं लोग भी अपने खर्चों पर लगाम लगा रहा. इसके अलावा छोटे दुकानदार बढ़े हुए खर्चे का बोझ भी आम जनता पर डाल रहे हैं. होर्मुज बंद किए जाने के बाद से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

व्हाइट हाउस अधिकारियों का कहना है कि यह परेशानी कुछ वक्त के लिए है. इस ऑपरेशन के साथ ही यह समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी. 

ट्रंप अगले दो-तीन हफ्ते इस युद्ध के लिए निर्णायक क्यों बता रहे? 

इधर ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर अपने भाषण में अगले चरण को निर्णायक ही बताया है. हालांकि माना जा रहा है कि ट्रंप की बयानबाजी छोटी जीत को बड़ा दिखाने भर की है. उन्होंने अभी ईरान के पावर प्लांट पर बमबारी करने और ईरान को वापस पाषाण युग में भेजने की धमकी दी है. इसके अलावा उन्होंने कहा है कि हजारों की संख्या में अमेरिकी सैनिकों को इकट्ठा किया गया है. कुछ लोगों की राय है कि जीत का दावा करने के लिए ट्रंप एक छोटा सा झंडा किसी जगह पर गाड़ दें. 

एक्सपर्ट्स मानकर चल रहे हैं कि अमेरिका की तरफ से जोरदार हमले हो सकते हैं. इधर, ट्रंप के भाषण के बाद से इजरायल पर ईरान के मिसाइल हमले बढ़ गए हैं. कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ गई है.

अमेरिका के विदेश मंत्री रूबियों ने अपने भाषण में क्या कहा है? 

इधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रात को एक जोरदार भाषण दिया. ईरान  को लेकर हमारे क्या मकसद हैं, इस बारे में वे पूरी तरह साफ थे. 

रूबियो ने अमेरिका के मकसद को गिनाया. उन्होंने कहा कि  उनके हथियारों की फैक्ट्रियों को तबाह करना, उनकी नौसेना को तबाह करना, उनकी वायुसेना को तबाह करना, और उनके परमाणु हथियार हासिल करने के मौके को खत्म करना शामिल है. 

क्या ट्रंप यूरेनियम को जीत की निशानी के तौर पर हासिल करना चाहते हैं? 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान के यूरेनियम को जीत की निशानी के तौर पर हासिल करने की कोशिश करेंगे. इसके अलावा बहुत सारा शुद्ध यूरेनियम निकालने के लिए अमेरिका ने जमीनी सेना को भेजने का विचार किया है. यह एक ऐसा मिशन हो सकता है, जिसमें सैकड़ों या हजारों की संख्या में सैनिक शामिल होंगे. उन्हें काफी बड़े खतरे का सामना करना पड़ेगा.

हालांकि, एक्सपर्ट्स इस ऑपरेशन को लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद ही मुश्किल बताते हैं. साथ ही पूरी संभावना है कि यह लंबा भी चल सकता है. इसकी सफलता की कोई गारंटी भी नहीं है. यह कदम रणनीतिक कम प्रतीकात्मक लगता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका अपनी इज्जत बचाने की कोशिश में है. ताकि इस संघर्ष से कोई ठोस नतीजा निकलने का दावा किया जा सके. असल में यह संघर्ष ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म करने में नाकाम रहा है. 

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