CBI ने इंटरनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क का किया भंडाफोड़, नोएडा, दिल्ली और कोलकाता में मारे छापे, 6 आरोपी गिरफ्तार


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केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक बड़े इंटरनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. यह नेटवर्क पिछले तीन साल से अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बना रहा था. यह कार्रवाई अमेरिका की जांच एजेंसी FBI से मिली जानकारी के आधार पर की गई. 

सीबीआई की जांच में क्या हुआ खुलासा?

जांच में सामने आया कि ये गैंग खुद को ड्रग इंफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA), FBI और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (SSA) जैसी अमेरिकी संस्थाओं के अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था. वे अमेरिकी नागरिकों को डराते थे कि उनके सोशल सिक्योरिटी नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग डिलीवरी में हुआ है और उनके बैंक अकाउंट तुरंत फ्रीज हो जाएंगे. 

इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी पीड़ितों को ये यकीन दिला देते थे कि उनका पैसा खतरे में है और उन्हें फंड सिक्योर अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा. इसी बहाने पीड़ितों से करीब 8.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 71 करोड़ रुपये ठग लिए गए. ये पैसा आरोपी क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट और विदेशी बैंक खातों में भेजते थे. 

सीबीआई ने कई शहरों में मारे छापे

सीबीआई ने मंगलवार (9 दिसंबर, 2025) को इस मामले में केस दर्ज किया और इसके बाद दिल्ली, नोएडा और कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की. नोएडा में एक अवैध कॉल सेंटर चल रहा था, जहां आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर ठगी करते थे. सीबीआई की टीम ने वहां छापा मारकर छह लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया और कॉल सेंटर को मौके पर ही बंद करा दिया. 

सीबीआई ने जिन 6 आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ा, उनके नाम-  

  • शुभम सिंह @Domnic
  • डालटैनियन @Michael
  • जॉर्ज टी. जमलियनलाल @Miles
  • एल. सीमिनलेन हाओकिप @Ronny
  • मैंगखोलून @Maxy
  • रॉबर्ट थांगखानखुआल @David @Munroin है.

छापेमारी में मिला करोड़ों का कैश और कई अहम सबूत

तलाशी के दौरान CBI ने बुधवार और गुरुवार (10-11 दिसंबर, 2025) को कई जगहों से भारी मात्रा में सबूत बरामद किए. इनमें 1.88 करोड़ रुपये कैश और 34 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क शामिल हैं. इसके अलावा, कई ऐसे दस्तावेज भी मिले, जो इस साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए थे. 

जांच में यह भी पता चला कि ये गैंग ठगी की रकम को वर्चुअल एसेट्स और बैंक ट्रांसफर के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाता था यानी ये एक पूरी तरह संगठित ट्रांसनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क था.

साइबर ठगी के नेटवर्क को लेकर सीबीआई ने क्या कहा?

सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच कर रही है और ठगी की रकम का ट्रेल खोजने की कोशिश जारी है. सीबीआई का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी हो सकती है, क्योंकि यह नेटवर्क कई देशों तक फैला हो सकता है. 

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