Ethiopian Birr vs Indian Rupee: भारत से 1 लाख ले जाएंगे इथियोपिया तो कितनी हो जाएगी आपकी रकम? पीएम मोदी जा रहे हैं वहां


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 दिनों की यात्रा के लिए जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान निकले हुए हैं. इस दौरान वह 16 और 17 दिसंबर को इथियोपिया में रहेंगे. भारत और इथियोपिया दोनों विकासशील देश हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर है. यही अंतर उनकी करेंसी वैल्यू में भी साफ दिखाई देता है. इस बीच जब दो देशों की अर्थव्यवस्था, व्यापार या विदेशी निवेश की बात होती है तो उनकी मुद्रा की ताकत अहम हो जाती है. 

इथियोपिया की आधिकारिक मुद्रा इथियोपियन बिर्र है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे ETB कहा जाता है. इथियोपिया की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. उद्योग, निर्यात और विदेशी निवेश सीमित होने की वजह से वहां की करेंसी पर अक्सर दबाव बना रहता है. भारत की राष्ट्रीय मुद्रा भारतीय रुपया (INR) है. भारत आईटी, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में मजबूत स्थिति रखता है. इसी वजह से भारतीय रुपया कई विकासशील देशों की मुद्राओं की तुलना में ज्यादा स्थिर माना जाता है.

1 इथियोपियन बिर्र की वैल्यू

वाइस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक 1 इथियोपियन बिर्र की वैल्यू भारतीय रुपया के मुकाबले महज 0.59 पैसे हैं. वहीं 1 भारतीय रुपये की कीमत इथियोपिया में 1 रुपया 70 पैसे के बराबर है. इस हिसाब से अगर कोई भारतीय 1 लाख रुपये लेकर इथियोपिया जाता है तो वहां जाकर उसकी कीमत 1 लाख 69 हजार 981 रुपया हो जाएगा.

इथियोपियन बिर्र कमजोर क्यों है?

इथियोपिया की मुद्रा कमजोर रहने के पीछे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की कमी, आयात ज्यादा और निर्यात कम, विदेशी मुद्रा भंडार सीमित, महंगाई दर अधिक और राजनीतिक और क्षेत्रीय अस्थिरता को माना जाता है. इन कारणों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिर्र की मांग कम बनी रहती है.

भारतीय रुपया मजबूत क्यों माना जाता है?

भारतीय रुपये को मजबूती देने वाले प्रमुख कारणों में बड़ा घरेलू उपभोक्ता बाजार, तेजी से बढ़ता डिजिटल और आईटी सेक्टर, निर्यात में लगातार सुधार, विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत बैंकिंग सिस्टम शुमार है. हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर दिखता है, लेकिन अफ्रीकी देशों की कई मुद्राओं से अब भी बेहतर स्थिति में है.

भारत-इथियोपिया व्यापार में करेंसी की भूमिका

भारत और इथियोपिया के बीच दवाइयों, कृषि उत्पादों, मशीनरी और टेक्सटाइल का व्यापार होता है, लेकिन करेंसी वैल्यू में अंतर होने के कारण अधिकतर लेन-देन अमेरिकी डॉलर या अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में किया जाता है, जिससे इथियोपियन बिर्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.

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