नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल-सोनिया की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया


22 दिसंबर 2025 को नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है. दरअसल, इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने राहुल-सोनिया के खिलाफ चार्जशीट पर एक्शन लेने से इनकार कर दिया था. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने अगले साल सुनवाई की तारीख दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने ED की याचिका मंजूर करते हुए 12 मार्च 2026 को सुनवाई की अगली ताीख दी है. ED की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलील में  कहा कि अंतिम निष्कर्ष यह है कि 50 लाख रुपए की राशि के बदले आरोपियों को 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति हासिल हुई है.

तुषार मेहता ने कहा कि जून 2014 को एक व्यक्ति द्वारा प्राइवेट कंप्लेंट दायर की गई, जिसपर निचली अदालत ने संज्ञान लिया था और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसपर स्टे लगा दिया था.

चार्जशीट में कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल

ED ने अपनी चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को नामजद किया था. ED की जांच पर कांग्रेस की दलील थी कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, जबकि ED का दावा है कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है जिसमें फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं.

ED का सोनिया-राहुल पर बड़े घोटाले का आरोप

ED का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लि. (AJL) की 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कब्जे के लिए उसका अधिग्रहण प्राइवेट कंपनी ‘यंग इंडियन’ के जरिए सिर्फ 50 लाख रुपए में किया था. इस कंपनी के 76% शेयर सोनिया और राहुल के पास हैं.

इस मामले में ‘अपराध से अर्जित आय’ 988 करोड़ रुपए मानी गई. साथ ही संबद्ध संपत्तियों का बाजार मूल्य 5,000 करोड़ रुपए बताया गया है.

नेशनल हेराल्ड केस क्या है?

जिस नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है, वो नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ा है. इसकी शुरुआत 1938 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 5 हजार स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर की थी. इस अखबार का प्रकाशन AJL करता था. 2008 में यह अखबार बंद हो गया था. फिर इसके अधिग्रहण पर विवाद और घोटाले की खबरें सामने आने लगीं थीं.



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