देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी की आज (25 दिसंबर) 101वीं जयंती है. इस मौके पर बीजेपी पूरे देश में कई कार्यक्रम आयोजित कर रही है. कवि रहे वाजपेयी का राजनीति में अपना अलग ही जलवा था. विरोधी पार्टियों के नेता आज भी अटल बिहारी को याद कर उनकी तारीफ करते हैं. अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्ते विपक्षी नेताओं संग भी अच्छे थे, ऐसा ही एक वाकया पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ा है.
पश्चिम बंगाल में अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी और ममता की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की लड़ाई जग जाहिर है. हर बार की तरह इस बार भी बंगाल चुनाव में मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच है. एक समय ऐसा भी था, जब ममता बनर्जी खुद बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए में शामिल थीं. हालांकि तब भी वो एनडीए सरकार के लिए सिरदर्द बनी रहती थीं.
अटल बिहारी वाजेपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में ममता बनर्जी रेल मंत्री रह चुकी हैं. उस दौरान भी वो अक्सर सरकार के कामकाज पर सवाल उठाती रहती थीं. कभी मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर तो कभी मंत्रालयों में कामकाज को लेकर तनातनी बनी रहती थी. अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर विजय त्रिवेदी की किताब- ‘हार नहीं मानूंगा एक अटल जीवन गाथा’ में बताया गया है कि जब ममता रेल मंत्री थीं तो सरकार के लिए कोई ना कोई मुसीबत पैदा करती रहती थीं.
जब ममता के घर पहुंचे प्रधानमंत्री वाजपेयी
उस दौरान एक बार पेट्रोल- डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर ममता बनर्जी सरकार से काफी नाराज हो गईं. इसके बाद उन्हें मनाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से जॉर्ज फर्नांडीज को कोलकाता भेजा गया, लेकिन ममता ने जॉर्ज से मुलाकात नहीं की. इसके बाद एक दिन अचानक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ममता बनर्जी के घर पहुंच गए और उस दिन ममता कोलकाता में नहीं थीं.
‘आपकी बेटी बहुत तंग करती है’
ममता बनर्जी के घर पहुंचकर वाजपेयी ने उनकी मां के पैर छुए और हालचाल पूछा. साथ ही अटल ने ममता बनर्जी की मां से मजाकिया लहजे में कहा कि आपकी बेटी बहुत शरारती है, बहुत तंग करती है. अटल बिहारी के इस कदम से ममता का गुस्सा गायब हो गया. इसके कुछ समय बाद ममता बनर्जी दूसरे मुद्दों पर एनडीए सरकार से अलग हो गईं और साल 1998 में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया.
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