खुद को इस्लाम का ठेकेदार बताने वाला पाकिस्तान अब दुनिया को पिलाएगा शराब, मुनीर के घर के पास बनी फैक्ट्री से होगा एक्सपोर्ट


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इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान कई दशकों के बाद एक बार फिर से दुनिया को शराब बेचने जा रहा है. 50 साल से ज्यादा के बैन के बाद पाकिस्तान की मरी ब्रूअरी नाम की शराब कंपनी को विदेश में शराब एक्सपोर्ट की परमिशन मिल गई है. बता दें कि अभी पाकिस्तान में शराब बेचने, खरीदने और पीने पर कई तरह के बैन हैं.

रावलपिंडी स्थिति फैक्ट्री में शराब का प्रोडक्शन बढ़ गया है. मरी ब्रूअरी की शुरुआत ब्रिटिश भारत में 1860 में सैनिकों के लिए की गई थी. पाकिस्तान के अलग देश बनने के बाद जुल्फिकार भुट्टो के समय शराब को लेकर कड़े नियम बनाए गए. हालांकि तमाम कड़े नियमोंं के बावजूद ये कंपनी पाकिस्तान में चल रही है. 

कौन है मरी ब्रूअरी का मालिक
मरी ब्रूअरी को इस्फान्यार भंडारा चला रहे हैं, जो इस बिजनेस को चलाने वाले अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं. पाकिस्तानी सांसद इस्फान्यार पारसी समुदाय से आते हैं. उनके परिवार का पाकिस्तान की राजनीति और बिजनेस में अच्छा खासा दखल है. वो बताते हैं कि एक्सपोर्ट की इजाजत मिलना कंपनी के लिए बड़ी खुशी की बात है. उन्होंने कहा कि मेरे दादा और पिता ने एक्सपोर्ट लाइसेंस की कोशिश की, लेकिन उन्हें यह नहीं मिल सका था. एक्सपोर्ट बैन हटाने के लिए सालों की लंबी लॉबिंग और कोशिशों के बाद उनको इसमें अहम कामयाबी मिली है.

मुनीर के घर के पास है शराब की फैक्ट्री
भंडारा ने बताया कि पहाड़ों में बनी मरी की लाल-ईंटों वाली शराब की फैक्ट्री अब रावलपिंडी में चल रही है. ये फैक्ट्री सेना प्रमुख आसीम मुनीर के घर के पास है, जो पाकिस्तान की सबसे ज्यादा सुरक्षा वाली जगहों में से एक है. एक्सपोर्ट बैन से पहले मरी अपने प्रोडक्ट पड़ोसी भारत और अफगानिस्तान के साथ-साथ खाड़ी देशों और अमेरिका तक बेचती थी. भंडारा का कहना है कि फिलहाल उनका लक्ष्य दुनिया में नए मार्केट तलाशना और पैर जमाना है.

कैसे हुई थी शुरुआत
पाकिस्तान के पहाड़ी शहर मरी के नाम पर मरी ब्रूअरी की शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी. ये पाकिस्तान की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी शराब कंपनी है. कंपनी बीयर, व्हिस्की, वोदका और जूस जैसे कई पेय बनाती है. मरी ब्रूअरी ऐसे इस्लामी देश में दशकों से चल रही है, जहां गैर-मुसलमानों को छोड़कर सभी के लिए शराब गैरकानूनी है. 

बता दें कि पाकिस्तान ने 1970 के दशक में मुसलमानों के लिए शराब पर बैन लगा दिया था. ऐसे में देश की 24 करोड़ की आबादी में से करीब 90 लाख लोग ही कानूनी तौर पर शराब खरीद सकते हैं.

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