अमेरिका के साथ सुलझेगा टैरिफ का मुद्दा? यूरोपीय यूनियन के साथ भी होगा ट्रेड एग्रीमेंट, भारत की ट्रेड डिप्लोमेसी!


भारत अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करने के लिए बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ रणनीतिक कदम तेज कर रहा है. अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे आर्थिक महाशक्तियों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर अब यह संकेत मिलने लगे हैं कि बातचीत निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है. सरकार का फोकस ऐसे समझौतों पर है, जो केवल आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि भारत के उद्योग, निवेश और रोजगार को दीर्घकालीन फायदा पहुंचाएं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर अधिकारियों के स्तर पर निरंतर संवाद जारी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश न्यायसंगत और संतुलित समझौते की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव रिक स्विट्जर ने दिसंबर के दूसरे सप्ताह में भारत का दौरा किया. नए पद पर यह उनका पहला भारत दौरा था, जिसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

उच्चस्तरीय बैठकों में सुलझे अहम मुद्दे

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. इन बैठकों में लंबे समय से अटके व्यापारिक मसलों पर गंभीर चर्चा हुई. टैरिफ से जुड़े मतभेद, बाजार तक पहुंच की मांग और नियामकीय अड़चनों को लेकर दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख सामने रखे. साथ ही यह भी चर्चा हुई कि मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर में सहयोग को किस तरह नई ऊंचाई दी जा सकती है.

भारत–EU FTA पर स्थिर लेकिन ठोस प्रगति

अमेरिका के साथ ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत भी आगे बढ़ रही है. रणधीर जायसवाल के अनुसार इस दिशा में संवाद लगातार जारी है और दोनों पक्ष पूरी तरह जुड़े हुए हैं.अक्टूबर में ब्रुसेल्स में हुए FTA के 14वें दौर के बाद यूरोपीय संघ के अधिकारी भारत आए. इसके अलावा दिसंबर में EU के ट्रेड कमिश्नर का भारत दौरा भी हुआ, जहां उन मुद्दों पर चर्चा हुई, जो अब तक सहमति से दूर थे.

मतभेद घटे, समाधान की ओर बढ़ रही बातचीत

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच कई स्तरों पर हुई बैठकों से मतभेद काफी हद तक कम हुए हैं.उन्होंने बताया कि इन-पर्सन और वर्चुअल दोनों माध्यमों से लगातार बातचीत हो रहा है. 

न्यूजीलैंड FTA से बढ़ा भारत का आत्मविश्वास

भारत की तरफ से हाल ही में न्यूजीलैंड के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता उसकी बदलती व्यापार नीति का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है. यह समझौता कम समय में पूरा हुआ और अब इसे भविष्य के व्यापार समझौतों के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंच मिली है और टैरिफ में राहत से प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ी है.

ये भी पढ़ें: India-Bangladesh Relations: ‘1971 का युद्ध एक धर्मयुद्ध था, होलोकॉस्ट से भी…’, भारतीय सेना के अधिकारी ने पाकिस्तान के काले कारनामों पर दिया बड़ा बयान



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *