तेल, कोयला, सोना… जानिए अमेरिका ने क्यों किया मादुरो के देश पर हमला?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद बार-बार उनके फैसलों में झलकता रहा है कि वह एक बिजनेसमैन हैं और उनकी नीतियां इस पर ही आधारित हैं. ट्रंप प्रशासन की नीतियों में व्यापार, मुनाफा और संसाधनों पर पकड़ सबसे ऊपर रही है. इसी कड़ी में अब वेनेजुएला को भी ट्रंप की इसी सोच का शिकार माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी सख्ती और सैन्य कार्रवाई के पीछे देश के विशाल प्राकृतिक संसाधन एक बड़ी वजह हैं.

तेल का सबसे बड़ा खजाना
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल मौजूद है. इस मामले में वेनेजुएला पहले और सऊदी अरब (267 अरब बैरल) दूसरे नंबर पर है. अमेरिका की नजर लंबे समय से इस तेल पर रही है, खासकर तब जब वेनेजुएला का तेल ढांचा कमजोर हो चुका है.

कोयले का बड़ा भंडार
वेनेजुएला में 10 अरब टन से ज्यादा कोयले का भंडार है. इसमें बड़ी मात्रा में बिटुमिनस कोल शामिल है, जो बिजली और उद्योग के लिए अहम माना जाता है. लैटिन अमेरिका में वेनेजुएला, कोलंबिया और ब्राजील के बाद तीसरा बड़ा कोयला उत्पादक देश है.

लोहे और बॉक्साइट की ताकत
वेनेजुएला के पास 4.1 अरब टन हाई क्वालिटी वाले लोहे का भंडार है, जो उसे दुनिया के टॉप 10-12 देशों में शामिल करता है. इसके अलावा वेनेजुएला में बॉक्साइट भी बड़ी मात्रा में है, जो एल्यूमीनियम उत्पादन के लिए जरूरी है. इस क्षेत्र में वेनेजुएला दुनिया के टॉप 15 देशों में गिना जाता है.

सोने की खान बना ओरिनोको इलाका
वेनेजुएला के ओरिनोको माइनिंग आर्क क्षेत्र में सोने का विशाल भंडार बताया जाता है. सरकारी दावों के अनुसार यहां 8,000 टन से अधिक सोना मौजूद है. यह लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े सोने के भंडारों में से एक है, हालांकि अवैध खनन भी यहां बड़ी समस्या बना हुआ है.

बिजनेस नजरिए से देखी जा रही सियासत
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को केवल राजनीतिक संकट के तौर पर नहीं, बल्कि एक बड़े व्यापारिक मौके के रूप में देख रहा है. तेल, सोना और खनिज संसाधनों से भरपूर वेनेजुएला ट्रंप की ‘बिजनेस फर्स्ट’ नीति में फिट बैठता है.



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