बांग्लादेश के जाने-माने सिंगर और अवामी लीग के नेता प्रोलय चकी की हिरासत में मौत हो गई है, जो 1980 के दशक में BTV के पॉपुलर कलाकार थे. उनके परिवार ने लापरवाही और मेडिकल इलाज न मिलने का आरोप लगाया है. चकी पाबना जिले की अवामी लीग में सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे. उनको 16 दिसंबर 2025 को भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के दौरान हुए एक कथित हमले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.
प्रोलय चकी अपने भाई मोलॉय चाकी के साथ अक्सर मंच साझा करते थे और उस दौर के दर्शकों के लिए एक चर्चित चेहरा बन गए थे. संगीत के साथ-साथ प्रोलॉय चाकी राजनीति में भी सक्रिय थे. वे आवामी लीग की पाबना जिला इकाई के सांस्कृतिक मामलों के सचिव के पद पर कार्यरत थे. इस भूमिका में वे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन, स्थानीय कलाकारों को मंच देने और राजनीतिक गतिविधियों में सांस्कृतिक सहभागिता सुनिश्चित करने का काम करते थे. उनकी पहचान केवल एक कलाकार तक सीमित नहीं थी. यही वजह है कि उनकी हिरासत में हुई मौत को सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि मानवाधिकार और जेल व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है.
गिरफ्तारी, हिरासत और बिगड़ी तबीयत
प्रोलॉय चाकी को 16 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. उनकी गिरफ्तारी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन छात्र आंदोलन से जुड़े एक कथित हमले के मामले में हुई. हालांकि, उनके परिवार का दावा है कि गिरफ्तारी के समय उनका नाम किसी भी एफआईआर या केस में दर्ज नहीं था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें पाबना जेल भेज दिया गया. जेल प्रशासन के अनुसार, चाकी पहले से ही डायबिटीज और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे. पाबना जेल के अधीक्षक एमडी ओमर फारुक ने बताया कि हिरासत के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई. शुक्रवार को उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद पहले पाबना जनरल अस्पताल ले जाया गया. हालत गंभीर होने पर उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान रात करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई.
परिवार का आरोप
प्रोलॉय चाकी के परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनके बेटे सोनी चाकी का कहना है कि उनके पिता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी जेल प्रशासन ने आधिकारिक रूप से परिवार को नहीं दी. सोनी चाकी ने कहा, ‘मेरे पिता लंबे समय से डायबिटीज और दिल की बीमारी से पीड़ित थे. जेल में उनकी हालत बिगड़ती गई, लेकिन हमें इसकी जानकारी नहीं दी गई. जब अन्य लोगों से खबर मिली तो हम अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. उन्हें सही इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई.’ परिवार का यह भी कहना है कि इतनी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग व्यक्ति को हिरासत में रखने के दौरान विशेष चिकित्सा निगरानी होनी चाहिए थी. इस कथित चूक ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है.
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