अमेरिका इधर ईरान और ग्रीनलैंड की लड़ाई में फंसा हुआ है, उधर रूस ने नए साल के पहले बड़े हमले में अमेरिका में बने F-16 फाइटर जेट को मार गिराया है. ये जानकारी रूस की सरकारी मीडिया की ओर से दी गई है.
सैन्य सूत्रों के मुताबिक, रूस की सेना ने S-300 एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से इस लड़ाकू विमान को निशाना बनाया. रूसी सेना के कमांडर कॉलसाइन सेवर ने ये जानकारी दी है. इससे पहले मिसाइल से विमान को नुकसान पहुंचाया गया और फिर दूसरी मिसाइल से उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है. रूस ये दिखाना चाहता है कि पश्चिमी देशों के हाईटेक फाइटर जेट भी रूसी एयर डिफेंस के सामने नहीं टिक पाते.
यूक्रेन को कबसे मिल रहे हैं F-16 लड़ाक विमान
दरअसल यूक्रेन को अगस्त 2024 से अमेरिका और यूरोपीय देशों से F-16 लड़ाक विमान मिलने शुरू हुए थे. इन विमानों को यूक्रेन की एयर डिफेंस क्षमता मजबूत करने के लिए तैनात किया गया है. यूक्रेन के अधिकारियों का दावा है कि F-16 की मदद से सैंकड़ों रूसी मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया जा चुका है. हालांकि यूक्रेन ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है.
पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन को रूस से लड़ने के लिए F-16 फाइटिंग फाल्कन दिया गया था, जिसे लेकर उसकी हवाई सीमा को सुरक्षित और मजबूत बनाने की कोशिश की गई थी. वहीं यूक्रेन की नेशनल सिक्योरिटी एंड डिफेंस काउंसिल से जुड़े सेंटर फॉर काउंटरिंग डिसइन्फॉर्मेशन ने इसे रूस का दुष्प्रचार बताया है.
यूक्रेन की एयरफोर्स ने क्या कहा
यूक्रेनी एयरफोर्स ये दावा कर रही है कि F-16 के पायलट अब भी एक्टिव हैं. बता दें कि F-16 लड़ाकू विमानों के यूक्रेन पहुंचने के बाद से वो यूक्रेनी हवाई सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बन गए हैं. इन विमानों ने हवाई हमलों से निपटने में मौजूद कमियों को भरने में काफी मदद की है. यूक्रेनी पायलटों का कहना है कि इन फाइटर जेट्स की मदद से रूसी हमलों के दौरान सैंकड़ों मिसाइलों को हवा में मार गिराया गया.
F-16 गिराए जाने की स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि होना बाकी
बता दें कि युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अक्सर एक-दूसरे पर अपुष्ट दावे का आरोप लगाते रहे हैं. ऐसे में F-16 के गिराए जाने की पुष्टि स्वतंत्र स्रोतों से होना बेहद अहम है, क्योंकि यूक्रेन के पास इन फाइटर जेट्स की संख्या काफी सीमित है और हर नुकसान उसकी रक्षा क्षमता पर असर डाल सकता है. ऐसे में अगर F-16 लड़ाकू विमान के गिराए जाने की पुष्टि होती है तो इससे यूक्रेन की हवाई सुरक्षा क्षमता कमजोर साबित होगी और वो भी तब जब लगातार हवाई हमलों का खतरा बना हुआ है.
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