स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित एक अहम पैनल चर्चा के दौरान IBM के सीईओ अरविंद कृष्णा ने भारत की तकनीकी क्षमताओं को लेकर हो रही आलोचनाओं पर साफ और दोटूक जवाब दिया. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ मंच साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि भारत टेक इनोवेशन, खासकर एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में पिछड़ा हुआ है.
निजी टीवी चैनल से बातचीत में अरविंद कृष्णा ने कहा कि भारत में टेक्नोलॉजी का बड़ा हिस्सा बिल्कुल नए ऐप बनाने तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियां मौजूदा सिस्टम को बेहतर करने, उन्हें स्केल करने और लंबे समय तक संभालने का काम करती हैं, जिसमें गहरी एंटरप्राइज और AI इनोवेशन शामिल होता है. उनके मुताबिक, भारतीय टेक टैलेंट को सिर्फ एप्लिकेशन लेवल तक सीमित बताना एक सतही और गलत आकलन है.
टेक क्रांति में वैल्यू कैसे शिफ्ट होती है
IBM CEO ने टेक्नोलॉजी के विकास को समझाते हुए कहा कि हर तकनीकी क्रांति में मूल्य का केंद्र बदलता है. शुरुआत से ही पहले सेमीकंडक्टर जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश होता है, फिर ऑपरेटिंग सिस्टम और अंत में एप्लिकेशन स्तर पर सबसे ज्यादा इनोवेशन दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि आमतौर पर 10 साल से भी कम समय में 90% वैल्यू एप्लिकेशन इनोवेशन में चली जाती है. अगर भारत इस बदलाव को सही समय पर अपनाता है तो इनोवेशन और निवेश—दोनों में बड़ा उछाल आ सकता है.
बड़े AI मॉडल नहीं, छोटे स्मार्ट मॉडल भारत की ताकत
लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) पर बोलते हुए अरविंद कृष्णा ने कहा कि भविष्य में ट्रिलियन-पैरामीटर वाले बड़े AI मॉडल आम और सस्ते हो जाएंगे. ऐसे मॉडल्स की कीमत और स्विचिंग कॉस्ट बहुत कम होगी, जिससे वे किसी भी देश के लिए खास रणनीतिक बढ़त नहीं देंगे. इसके बजाय उन्होंने भारत को छोटे, विशेषीकृत और प्रभावी AI मॉडल विकसित करने की सलाह दी, जिनमें देश का सोवरेन डेटा शामिल हो. उन्होंने साफ कहा कि ऐसे मॉडल भारत में बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए.
सोवरेन AI से मिले शानदार नतीजे
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस सोच का समर्थन किया. उन्होंने बताया कि हाल ही में एक बड़े रक्षा परिदृश्य में सोवरेन AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणाम बेहद प्रभावशाली रहे. उनका कहना था कि अलग-अलग सेक्टर्स के लिए छोटे और खास मॉडल्स का पूरा इकोसिस्टम बनाना ही आर्थिक और रणनीतिक लाभ की सही दिशा है.
AGI को लेकर अलग सोच
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) पर अरविंद कृष्णा ने सिलिकॉन वैली की प्रचलित सोच से अलग नजरिया रखा. उन्होंने कहा कि AGI पर विश्वास करना किसी विचारधारा या धर्म जैसा हो गया है. कुछ लोग मानते हैं कि ज्यादा डेटा और बड़े मॉडल्स से हम वहां पहुंच जाएंगे, लेकिन वह इस सोच से सहमत नहीं हैं. उनके अनुसार, असली चुनौती यह है कि ज्ञान को AI मॉडल्स में सही तरीके से कैसे डाला जाए और यही आज विज्ञान की सबसे बड़ी कमी बनी हुई है.
भारत के लिए व्यावहारिक भविष्य
IBM CEO ने कहा कि 50 बिलियन पैरामीटर जैसे कुशल और सेक्टर-स्पेसिफिक मॉडल्स ही भविष्य में सबसे उपयोगी साबित होंगे. ये न केवल बड़े मॉडल्स की तुलना में करीब 100 गुना सस्ते हैं, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए बड़े पैमाने पर नवाचार और आत्मनिर्भर AI विकास के नए रास्ते खोलते हैं.
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