‘US प्रेसिडेंट ने 5 बार किया फोन, लेकिन हमने…’, PAK संसद में गाजा पर चर्चा के दौरान शहबाज के मंत्री ने पढ़े कसीदे


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में गाजा के लिए गठित शांति बोर्ड में शामिल होने के करार पर हस्ताक्षर कर दिया है. अब इसे लेकर पाकिस्तान में ही शहबाज शरीफ की खूब आलोचना हो रही है. वहां की मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि पाकिस्तान सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं करती है. इमरान खान की पार्टी ने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय महत्व के फैसले हमेशा पूरी पारदर्शिता और सभी राजनीतिक पार्टियों के साथ सलाह मशविरा करके लिया जाना चाहिए. इसे लेकर पाकिस्तानी मंत्री ने संसद में बयान दिया है.

दुनिया ने हम पर बनाया था दबाव: PAK मंत्री

पाकिस्तान सरकार में योजना मंत्री अहसान इकबाल ने संसद में शहबाज शरीफ के कसीदे पढ़ने लगे. उन्होंने कहा, ‘गाजा और फिलिस्तीन में शांति के लिए योगदान देने में अपने मुस्लिम भाई देशों के साथ पाकिस्तान का केंद्रीय मंच पर होना एक राजनयिक जीत है.’ इस दौरान उन्होंने साल 1998 में पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय दुनिया ने हमारे ऊपर बहुत  बनाया था.

‘US प्रेसिडेंट ने 5 बार किया फोन’

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अहसान इकबाल ने अपने भाषण की शुरुआत 1998 में पाकिस्तान की ओर से किए गए परमाणु परीक्षणों का जिक्र करते हुए की. उन्होंने कहा, ‘हमने पाकिस्तान की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उदाहरण पेश किया जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने पांच बार फोन किया था. इस समय पाकिस्तान पर दुनियाभर से दवाब था, लेकिन हमने साहस दिखाते हुए परमाणु परीक्षण किया.’

हमारे रहते पाकिस्तान को खतरा नहीं: अहसान इकबाल

विपक्षी पार्टी के विरोध पर उन्होंने कहा, ‘हमें पाकिस्तान की रक्षा और अखंडता के बारे में सिखाने की जरूरत नहीं है. हम पाकिस्तान की स्वतंत्रता और संप्रभुता के रक्षक हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पीएमएल-एन (शहबाज शरीफ की पार्टी) के सत्ता में होने से पाकिस्तान की अखंडता और संप्रभुता को कोई खतरा नहीं हो सकता.’

उन्होंने कहा, ‘फिलिस्तीन में खून खराबे को रोकने के लिए मुस्लिम देशों ने एक पहल की है. विपक्ष फिलिस्तीन के लोगों के लिए शांति को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है. अगर सरकार ने शांति बोर्ड में शामिल न होने का फैसला किया होता तो विपक्षी सदस्य यह आरोप लगाते कि पाकिस्तान को कोई महत्व नहीं दिया गया, उसे अलग-थलग कर दिया गया.’



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