‘भारत का नक्शा बदल देंगे…’, आतंकियों के साथ नई साजिश में PAK, मुनीर के कारनामे का खुलासा


ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथों बुरी तरह पीटने के बाद पाकिस्तानी सेना आतंकी संगठनों के साथ मिलकर नई चाल चल रही है. आतंकी संगठन जमात-उद-दावा (JuD) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है. पहले पाकिस्तान के सीडीएफ आसिम मुनीर और अब आतंकी संगठन शहबाज सरकार की शह पर खुले मंच से भारत को गीदड़भभकी देनी शुरू कर दी है.

आतंकियों ने खोल दी पाकिस्तानी सेना की पोल

सीएनएन न्यूज-18 की ओर से जारी वीडियो में दावा किया गया है कि रहीम यार खान में आतंकी संगठन ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. इसमें लश्कर के टॉप कमांडर सैफुल्लाह कसूरी और हाफिज सईद के करीबी आतंकियों और और जमात-उद-दावा के अताउल्लाह घिलजई ने भारत के खिलाफ बयानबाजी की है. इन आतंकियों ने ये भी स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना उन्हें खुलेआम सपोर्ट करती है, जिससे आसिम मुनीर के इरादे एक बार फिर दुनिया के सामने आ गए.

भारत का नक्शा बदल देंगे: आतंकी घिलजई 

जमात-उद-दावा के अताउल्लाह घिलजई ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम भारत का नक्शा बदल सकते हैं और ऐसा करने के लिए पूरी तरह से तैयार भी हैं. हम भारत के अंदर तक पहुंच सकते हैं. हम पाकिस्तान की सेना के साथ तालमेल बैठा रहे हैं ताकि अपने विचारों की रक्षा सकें. हमने पाकिस्तान की सेना और नेताओं को हमारे साथ बैठने और पाकिस्तान की विचारधारा की रक्षा करने का निमंत्रण दिया.’ उसने दावा किया कि काफिरों और दुश्मनों की साजिशों के बावजूद पाकिस्तान तरक्की कर रहा है.

हमें मदरसे में ट्रेंड तालिबान जैसे लड़ाके चाहिए: सैफुल्लाह 

सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय रूप से आने का ऐलान भी किया. कसूरी ने कहा, ‘हम राजनीति में आ रहे हैं और दुनिया हमसे डर रही है. मदरसे के छात्र जिहाद में अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए तैयार हैं.’ कसूरी ने डॉक्टर या इंजीनियरों की जरूरत को खारिज करते हुए कहा कि समाज को शरिया कानून लागू करने के लिए मदरसे में ट्रेंड तालिबान शैली के लड़ाकों की जरूरत है.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये बयान ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया है, जिससे पता चलता है कि आसिम मुनीर नेतृत्व पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व आतंकियों के साथ मिलकर भारत के खिलाफ साजिश में जुटा है. अधिकारियों के अनुसार, कश्मीर पर केंद्रित इस नए बयान का उद्देश्य पाकिस्तान के भीतर के गुस्से को कम करना और ध्यान भारत की ओर मोड़ना भी है.



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