वायुसेना ने गणतंत्र दिवस के मौके पर पाकिस्तान को याद दिलाया ऑपरेशन सिंदूर, IAF ने दिखाए एयर स्ट्राइक वाले हथियार


भारतीय वायु सेना (IAF) ने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ के ऊपर आसमान में अपने शौर्य, साहस और लड़ाकू विमानों का शानदार प्रदर्शन किया. वहीं, इस दौरान IAF ने उन सभी निंदा और आलोचना करने वालों को भी करारा जवाब दिया, जो भारतीय वायुसेना पर ये आरोप लगाते रहे हैं कि उसने 2019 में पाकिस्तान के भीतर बालाकोट में किए गए हवाई हमलों और पिछले साल मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया, जिनका वह दावा करती है.

जब पूरा भारत एकजुट होकर 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, तब भारतीय वायु सेना ने एक छोटा, लेकिन स्पष्ट रूप से एक बेहद प्रभावशाली मैसेज दिया. जहां, दशकों से गणतंत्र दिवस परेड में IAF के लड़ाकू विमान नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं, वहीं इस बार वायु सेना ने कुछ अलग किया.

भारतीय वायु सेना ने शेयर किया वीडियो

भारतीय वायु सेना ने पहली बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें लड़ाकू विमानों को फुली लोडेड हार्डपॉइंट्स दिखाया गया और उन पर वो सभी हथियार लगाए गए थे, जिनका इस्तेमाल बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था.

वीडियो पोस्ट में भारतीय वायु सेना ने कहा, ‘#IAFSindoorFormation अपनी सभी सहयोगी सेवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर, गणतंत्र दिवस 2026 पर सिंदूर फॉर्मेशन ने सटीक और समयबद्ध हवाई अभियानों के माध्यम से सैन्य परिणामों को आकार देने में भारतीय वायु सेना की भूमिका को रेखांकित किया.’

IAF ने दिखाए कौन-कौन से हथियार

भारतीय वायुसेना की ओर से शेयर किए गए वीडियो में पहली बार भारत के सबसे नए लड़ाकू विमान राफेल पर लंबी दूरी के हवा से हवा में मार करने वाले मीटियोर मिसाइल को दिखाया गया. इसके अलावा, भारत का स्वदेशी रूप से निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस को भी मीटियोर मिसाइल दागते हुए दिखाया गया. वहीं, पूरी तरह हथियारों से लैस मिराज 2000 फाइटर जेट पर भी वही मिसाइलें लगीं थीं, जिनका इस्तेमाल IAF ने 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक में किया था.

पाकिस्तान के फैलाए सारे झूठ को किया तार-तार

वहीं, इस वीडियो के जरिए IAF ने पाकिस्तान की ओर से फैलाए गए उन सभी झूठों को भी खारिज कर दिया, जिसमें भारत के पास मीटियोर मिसाइल न होने और उसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए जाते रहे. जबकि इस मिसाइल के लिए कॉन्ट्रैक्ट को पहले ही सार्वजनिक रूप से पुष्टि की जा चुकी है.

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