तिब्बती बौद्ध धर्म के शीर्ष धर्मगुरु दलाई लामा ने अपना पहला ग्रैमी अवॉर्ड जीत लिया है. 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कार समारोह में दलाई लामा ने अपने एल्बम के लिए बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन और स्टोरी टेलिंग रिकॉर्डिंग के लिए यह अवॉर्ड जीता. उनके इस एल्बम का नाम ‘मेडिटेशन द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ है.
म्यूजिक की दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा इसके साथ ही के-पॉप और स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ पहली बार अवॉर्ड जीतने वालों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं. आपको बता दें कि ग्रैमी म्यूजिक की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जो ‘रिकॉर्डिंग अकेडमी’ की ओर से हर साल कलाकारों और तकनीकी पेशेवरों की उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है.
His Holiness the Dalai Lama Receives Grammy Recognition Highlighting Universal Responsibility and Compassion
Grammy Award Best Audiobook Narration – Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama.
I receive this recognition with gratitude and humility. I don’t see… pic.twitter.com/YhK5zlyhem
— Dalai Lama (@DalaiLama) February 2, 2026
दलाई लामा के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर कहा गया कि परम पावन दलाई लामा को सार्वभौमिक उत्तरदायित्व और करुणा को उजागर करने के लिए ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. ग्रैमी पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ ऑडियोबुक वाचन मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज पावन दलाई लामा. पोस्ट में लिखा गया कि मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं. मैं इसे व्यक्तिगत नहीं, बल्कि हमारी साझा सार्वभौमिक उत्तरदायित्व की मान्यता समझता हूं.
उन्होंने आगे कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता की समझ 8 अरब मनुष्यों के सामूहिक कल्याण के लिए आवश्यक है. मैं आभारी हूं कि यह ग्रैमी पुरस्कार इन संदेशों को और अधिक व्यापक रूप से फैलाने में सहायक होगा.
दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं. वो सिर्फ एक धार्मिक गुरु ही नहीं हैं, बल्कि वे शांति, अहिंसा, करुणा और आपसी सद्भाव के वैश्विक प्रतीक भी हैं. उन्होंने पूरी दुनिया में घूमकर मानव मूल्यों, मानसिक शांति, करुणा और आपसी समझ पर व्याख्यान दिए हैं. तिब्बत के मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने और अहिंसा का संदेश फैलाने के लिए साल 1989 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
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