अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस-इंडिया ट्रेड डील का ऐलान करते हुए दावा किया था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद करेगा. इसको लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) का जवाब सामने आया है. विदेश मंत्रालय ने शनिवार (7 फरवरी, 2026) को रूसी तेल खरीद को लेकर अपने पुराने रुख को दोहराया है. MEA ने कहा कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘भारत के ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल आधार है. जहां तक भारत की ऊर्जा स्रोतों का संबंध है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.’
रूस से तेल खरीद पर भारत ने एक बार रुख किया स्पष्ट
दरअसल, अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद कर दे. इस मामले में भारत ने स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा जरूरतें किसी भी अन्य विचार से ऊपर है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘बाजार की परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मुख्य आधार है. भारत के सभी फैसले इसी दृष्टिकोण से लिए गए हैं और आगे भी लिए जाएंगे.’
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर यह लगातार भारत का रुख रहा है. अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल से मिलने वाले धन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध के लिए करता है. हालांकि, रूस इस आरोप को सिरे से इनकार करता रहा है.
व्हाइट हाउस के दावे के बाद MEA ने जारी किया बयान
विदेश मंत्रालय (MEA) का यह बयान व्हाइट हाउस के उस दावे के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि भारत ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से कच्चे तेल के आयात को बंद करने और अमेरिका से खरीद बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है. अमेरिका की यह घोषणा उसी संदर्भ का हिस्सा थी, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने पर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को वापस लिया गया.