बांग्लादेश में 13वीं संसद चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छोटी पार्टियों का कितनी आसानी से ‘सूपड़ा साफ’ हो सकता है. जहां BNP ने 216 सीटों के साथ लैंडस्लाइड जीत हासिल की और जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें बटोरीं, वहीं बांग्लादेश जतियो पार्टी (BJP) को सिर्फ एक सीट मिली और वो भी भोला-1 सीट से, जहां पार्टी चेयरमैन अंदलीव रहमान पार्थो ने ‘बैलगाड़ी’ सिंबल पर 1,04,462 वोट लेकर जीत दर्ज की. उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के नजरुल इस्लाम थे, जिन्हें 73,773 वोट मिले.
बांग्लादेश चुनाव में छोटी पार्टियों का सूपड़ा साफ
यह बीजेपी के लिए बड़ी बात है, क्योंकि चुनाव में वो कहीं नहीं चली. पार्टी के ज्यादातर उम्मीदवार या तो हार गए या उनका नामोनिशान मिट गया. ठीक वैसे ही जैसे भारत में कई छोटी पार्टियां ‘साइकिल’, ‘हाथी’, ‘तलवार’ या ‘ट्रैक्टर’ सिंबल लेकर मैदान में उतरती हैं, लेकिन बड़े दलों के आगे उनका कोई जोर नहीं चलता. बांग्लादेश में भी बीजेपी ने बड़े सपने देखे थे, लेकिन नतीजे आए तो सिर्फ एक सीट. जबकि भारत की बीजेपी बिल्कुल अलग है. भारत में बीजेपी केंद्र के साथ कई राज्यों में सरकार बनाए हुई है. दोनों देशों में बीजेपी का नाम जरूर एक जैसा है, लेकिन हालात बिल्कुल अलग हैं.
हाथी सिंबल वाली बांग्लादेश रिपब्लिकन पार्टी (BRR) और साइकिल चिह्न वाली जातिय पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका. भारत में मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का चुनाव चिह्न हाथी है, जबकि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी का सिंबल साइकिल है. इसी तरह हाथ के निशान वाली बांग्लादेश मुस्लिम लीग (BML) और इसी नाम की लालटेन वाली पार्टी का भी सूपड़ा साफ रहा. भारत में हाथ कांग्रेस का चुनाव चिह्न है, जबकि लालटेन लालू यादव की आरजेडी का सिंबल है.
वोट बैंक बंटने या बड़े दलों का दबाव
चुनाव आयोग के मुताबिक कुल 297 सीटों के नतीजे घोषित हुए हैं. BNP ने 209, जमात-ए-इस्लामी ने 68, नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने 6, इंडिपेंडेंट्स ने 7 और बाकी छोटी पार्टियां जैसे खिलाफत मजलिस (2), इस्लामी आंदोलन (1), गनो ओधिकार परिषद (1), गनोसंघति आंदोलन (1) ने एक-एक या दो सीटें बटोरीं. लेकिन बीजेपी की हालत देखकर लगता है कि छोटी पार्टियां अगर बड़े गठबंधन में नहीं जुड़तीं तो उनका ‘सूपड़ा साफ’ होना तय है. भारत में भी कई पार्टियां ऐसी ही स्थिति में हैं. सिंबल अच्छा और उम्मीदवार मजबूत दिखते हैं, लेकिन वोट बैंक बंटने या बड़े दलों के आगे दबाव में आकर जीत मुश्किल हो जाती है.
16 फरवरी तक सरकार बना सकते हैं तारिक रहमान
तारिक रहमान की BNP ने दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने की तैयारी कर ली है. 16 फरवरी तक नई सरकार बन सकती है. यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया है, जहां पुरानी पार्टियां बाहर हो गईं और नई ताकतें उभरीं. लेकिन बीजेपी जैसी छोटी पार्टियों के लिए सबक है. बिना मजबूत गठबंधन या लोकल सपोर्ट के ‘हाथी’ भी चुनाव में कहीं नहीं पहुंच पाता. आने वाले दिनों में तारिक रहमान की सरकार बनने पर बांग्लादेश-भारत संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति पर असर दिखेगा.