टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से डोनाल्ड ट्रंप बौखला गए हैं और उन्होंने पूरी दुनिया पर फिर से टैरिफ बम फोड़ दिया है. ट्रंप ने पहले अतिरिक्त 10 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था लेकिन महज 24 घंटे के अंदर ही इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है. ट्रंप के इस फैसले पर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने सवाल उठाए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि अमेरिकी तत्काल प्रभाव से दुनिया भर के देशों पर लागू 10 फीसदी टैरिफ को बढ़ाते हुए 15 प्रतिशत करने जा रहा है. पुराना दावा दोहराते हुए उन्होंने कहा है कि तमाम देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आ रहे हैं और टैरिफ से जुड़ा ये फैसला उसी का जवाब है. साथ ही ये भी कहा कि टैरिफ हाइक पूरी तरह से कानून के दायरे में है और इसकी जांच-परख की जा चुकी है.
इससे पहले ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 10 फीसदी का टैरिफ लगाया था लेकिन अगले ही दिन शनिवार को टैरिफ बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया. इसे लेकर भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने वैश्विक टैरिफ पर कई सवाल उठाए हैं.
Seems hard for the President to rely on the 15 percent statute (sec 122) when his DOJ in our case told the Court the opposite: “Nor does [122] have any obvious application here, where the concerns the President identified in declaring an emergency arise from trade deficits, which…
— Neal Katyal (@neal_katyal) February 21, 2026
क्या बोले नील कत्याल
नील कत्याल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए धारा 122 पर भरोसा करते हुए इसका सहारा लेना मुश्किल नजर आता है, क्योंकि इसी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को इसके विपरीत बताया था. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि धारा 122 का कोई स्पष्ट अनुप्रयोग नहीं है, क्योंकि ट्रंप ने जिस आपातकालीन स्थिति का हवाला दिया था, वह व्यापार घाटे से जुड़ी है और 122 धारा Balance-of-Payments Deficit जैसी अलग परिस्थिति के लिए है.
‘उन्हें अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए’
उन्होंने आगे कहा कि अगर राष्ट्रपति बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाना ही चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए और कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास जाना चाहिए. हमारा संविधान भी यही कहता है कि अगर टैरिफ को लेकर ट्रंप के विचार इतने ही अच्छे हैं तो फिर उन्हें मानने में कांग्रेस को कोई भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए.
कौन हैं नील कत्याल
वो भारतीय-अमेरिकी वकील हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलीलों ने टैरिफ के मामले में ट्रंप को चित कर दिया था. उन्होंने कोर्ट में कहा कि अमेरिकी संसद के पास व्यापार को विनियमित करने की शक्ति है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस शक्ति को मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं कर सकते. इनका जन्म शिकागो में हुआ था और वो भारतीय अप्रवासी परिजन के बेटे हैं. कात्याल ने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हैं.
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