हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी करना देश के ताने-बाने को नष्ट कर रहा है? सुप्रीम कोर्ट को विश्व यादव परिषद के चीफ से क्यों पूछना पड़ा ये सवाल


फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के खिलाफ दाखिल याचिका बुधवार (25 फरवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी. याचिकाकर्ता ने फिल्म के टाइटल का विरोध किया है और कहा कि यादव समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है. याचिकाकर्ता को इस बात पर भी आपत्ति है कि यादव समुदाय की लड़की की मुस्लिम लड़के के साथ लव स्टोरी दिखाई गई है. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आपकी मुख्य आपत्ति फिल्म के टाइटल को लेकर है, लेकिन इसमें कहीं भी किसी जाति को गलत तरीके से नहीं बताया गया है. यह मामला फिल्म घूसखोर पंडत से अलग है. वहां ऐसा लग रहा था कि एक जाति के लोगों को भ्रष्ट बताया जा रहा है. इस फिल्म की जो भी कहानी है, वह काल्पनिक है. इसे लेकर इतना विरोध करना सही नहीं है.’

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार यादव लड़की और मुस्लिम लड़के के लव एंगल को लेकर याचिकाकर्ता की आपत्ति पर कोर्ट ने पूछा, ‘अगर हिंदू लड़की मुस्लिम लड़के से शादी करती है, तो क्या इससे देश का ताना-बाना नष्ट हो रहा है.’ कोर्ट ने कहा कि फिल्म का टाइटल कोई ऐसा विशेषण या शब्द नहीं है, जो यादव समुदाय को गलत तरीके से चित्रित करता हो.

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुईयां की बेंच ने कहा, ‘हमने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री का अध्ययन किया है. मुख्य आपत्ति ये है कि फिल्म का नाम यादव समुदाय को समाज में गलत तरीके से पेश करता है. इसलिए मुद्दा ये है कि फिल्म का नाम बदला जाना चाहिए. हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि फिल्म का टाइटल किसी समुदाय की छवि कैसे खराब कर सकता है, जबकि फिल्म के टाइटल में कोई ऐसा विशेषण या शब्द नहीं है, जिससे यादव समुदाय को गलत तरीके से दिखाया जाए. ये आपत्तियां पूरी तरह से निराधार हैं.’

कोर्ट ने फिल्म घूसखोर पंडत पर अपने आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि घूसखोर का मतलब भ्रष्ट होता है और जब किसी जाति के साथ इसको जोड़ा जाता है तो इसका नकारात्मक अर्थ निकलता है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में यादव समुदाय के साथ ऐसा कोई शब्द नहीं जोड़ा गया है, जो उसकी छवि को नकारात्मक दिखाए इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है. याचिकाकर्ता ने फिर भी दलील दी कि फिल्म का दावा है कि यह सच्ची घटना पर आधारित है. हालांकि, कोर्ट ने फिर भी याचका पर सुनवाई से इनकार कर दिया.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि फिल्म अभी तक रिलीज नहीं हुई है, लेकिन रिलीज होने के बाद अगर उन्हें कुछ आपत्तिजनक लगता है तो उन्हें कोर्ट आने की अनुमति दी जाए. इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘मोटी चमड़ी बनिए. यह एक काल्पनिक कहानी है. एक हफ्ते में ये सब खत्म हो जाएगा. आजकल कोई थिएटर नहीं जाता है. सब फोन पर ही फिल्म देखत हैं.’



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