बारामती में अजित पवार का चार्टर प्लेन कैसे हुआ था क्रैश? AAIB की जांच में सामने आए ये कारण


बारामती में 28 जनवरी 2026 की सुबह एक चार्टर्ड लियरजेट 45XR विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की जान चली गई थी. यह वीआईपी उड़ान थी और इसमें दो पायलट, एक केबिन क्रू और दो यात्री सवार थे. विमान सुबह करीब 8:46 बजे बारामती एयरफील्ड पर लैंडिंग की कोशिश कर रहा था.

शुरुआती जांच में पता चला कैसे हुआ प्लेन क्रैश?

जांच में सामने आया कि बारामती एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है जहां सिर्फ विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) के तहत उड़ान की अनुमति है और इसके लिए कम से कम 5 किलोमीटर विजिबिलिटी जरूरी होती है, लेकिन उस समय टावर से लगभग 3 किलोमीटर विजिबिलिटी बताई गई थी, यानी मौसम मानकों से कम था. इलाके में हल्का कोहरा और धुंध जैसी स्थिति भी थी. पहले प्रयास में पायलट ने रनवे 11 पर उतरने की कोशिश की, लेकिन बाद में गो-अराउंड किया और दोबारा चक्कर लगाया. दूसरी बार भी विमान ने रनवे 11 के लिए अप्रोच लिया. टावर ने ‘विंड्स कैल्म’ बताते हुए लैंडिंग की अनुमति दे दी.

पायलट ने रनवे दिखाई देने की सूचना दी, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद कॉकपिट से घबराहट भरी आवाज सुनाई दी. इसके तुरंत बाद विमान रनवे से लगभग 50 मीटर बाईं ओर जमीन से टकरा गया. टक्कर से पहले विमान पेड़ों से टकराया और फिर नीचे ढलान वाली जमीन पर गिरा. हादसे के बाद विमान में भीषण आग लग गई. पूरा कॉकपिट और केबिन जलकर नष्ट हो गया. इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई.

AAIB की शरुआती जांच में सामने आया है कि एयरफील्ड पर आधुनिक नेविगेशन सुविधा नहीं थी, मौसम की स्थायी व्यवस्था नहीं थी और रनवे मार्किंग भी काफी फीकी पड़ चुकी थी. विजिबिलिटी भी VFR मानकों से कम थी. फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर का डेटा निकाल लिया गया है और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर का विश्लेषण किया जा रहा है. अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के सटीक कारण स्पष्ट होंगे, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि कम विजिबिलिटी और एयरफील्ड की सीमित सुविधाएं इस हादसे में अहम कारक हो सकती हैं.

जांच एजेंसी ने DGCA को सिफारिश की

1. अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड पर VFR नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए.
2. मौसम सुविधा (MET) और लैंडिंग एड्स बेहतर किए जाएं.
3. ऐसे एयरफील्ड को रेगुलेटेड लाइसेंसिंग के तहत लाया जाए.
4. रनवे और सुरक्षा मानकों की नियमित ऑडिट हो.



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