ईरान में गूंजे धमाकों और सुप्रीम लीडर अयातुल्ली अली खामेनेई की मौत ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है. अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ सैन्य दबाव है या ईरान में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हमले में सबसे पहले खामेनेई को निशाना बनाना जरूरी था ताकि सरप्राइज अटैक का फायदा उठाया जा सके. उन्होंने संकेत दिया कि अगर ईरानी सर्वोच्च नेता को मौका मिला तो वह छिप सकते थे.
खामेनेई पर शनिवार की सुबह ही क्यों किया हमला?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि खामेनेई को शनिवार (28 फरवरी 2026) को निशाना बनाने की तैयारी की गई थी. उन्होंने बताया, ‘यह उम्मीद की जा रही थी कि खामेनेई शनिवार शाम को तेहरान में बैठक करेंगे, लेकिन इजरायली खुफिया एजेंसियों ने शनिवार सुबह एक बैठक का पता लगाया, जिसके बाद ये हमला पहले किया गया.’
इजरायल और अमेरिका के संयुक्त अभियान की शुरुआत में ही तेहरान में खामेनेई के हाई सिक्योरिटी वाले परिसर पर हमला हुआ और सैटेलाइट इमेज से पुष्टि हुई कि वह परिसर पूरी तरह से तबाह हो गया था. जैसे ही यूएस-इजरायल का हमला शुरू हुआ, तेहरान ने तेल अवीव, कतर, बहरीन, सऊदी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जॉर्डन और कुवैत के खिलाफ ड्रोन और मिसाइलों की बौछार करके जवाबी कार्रवाई की.
खामेनेई के हत्यारों से बदला लेगा ईरान: IRGC
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने खामेनेई के हत्यारों से बदला लेने की कसम खाई. IRGC ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इतिहास का सबसे भयानक हमला किया जाएगा. इजरायल ने कहा कि खामेनेई को उनके शीर्ष सहयोगियों के साथ मार दिया गया, जिनमें पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी और IRGC के कमांडर मोहम्मद पाकपुर शामिल थे.
दो ईरानी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि हमले के शुरू होने से कुछ ही समय पहले शनिवार को खामेनेई ने शमखानी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी से एक सुरक्षित स्थान पर मुलाकात की थी. ईरानी सरकारी टेलीविजन ने रविवार (1 मार्च 2025) को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर की पुष्टि की. ईरानी मीडिया ने उनकी बेटी, दामाद और पोती की मौत की भी बात कही.