<p style="text-align: justify;">मिडिल ईस्ट में जारी जंग के एक हफ्ते से ज्यादा हो गए हैं. अमेरिका और इजरायल की ओर से लगातार ईरान पर हमला जारी है तो वहीं तेहरान इसके जवाब में खाड़े देशों को निशाना बना रहा है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने घोषणा की थी कि ईरान अब किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा, जब तक कि ईरान पर होने वाला हमला उसी देश की जमीन से न किया जाए. ईरान ने रविवार (8 मार्च 2026) को भी बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया. </p>
<p style="text-align: justify;">अमेरिका और इजरायली सेना ने शनिवार (7 मार्च 2026) की रात को ईरान की लाइफलाइन माने जाने वाले तेल डिपो और ऊर्जा ढांचे पर जोरदार हमला किया. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण तेहरान और उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित शहरान (Shahran) तेल डिपो को निशाना बनाया गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में तेहरान के आसमान में आग के बड़े-बड़े गोले और धुएं का काला गुबार साफ देखा जा सकता है. </p>
<p style="text-align: justify;">इजरायल की सेना ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. IDF ने दावा किया कि उन्होंने एनर्जी के उस भंडार को निशाना बनाया है, जिसका इस्तेमाल ईरानी सेना कर रहे थे. यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिन में ही कहा था कि ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जारी युद्ध के बावजूद उन्हें ईंधन की बढ़ती कीमतों की चिंता नहीं है. वैश्विक तेल बाजारों में पर्याप्त आपूर्ति है और कीमतों में कोई भी उछाल अस्थायी होगा.एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने इस संघर्ष को अल्पकालिक अभियान बताया और इसके आर्थिक प्रभाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज कर दिया. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे अभी तेल की कीमतों की चिंता नहीं है. वहीं, ट्रंप ने सैन्य अभियान को लंबे समय से लंबित हस्तक्षेप बताया.</p>
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