मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बात कर क्षेत्र में बिगड़ती सैन्य स्थिति पर चर्चा की. पेजेश्कियन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक संगठनों से ईरान पर हुए हवाई हमलों के कारणों की जांच करने का आग्रह किया. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की जांच न करने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और भी खतरे में पड़ जाएगी.
पड़ोसी देशों पर हमला करने का इरादा नहीं: ईरान
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि तेहरान का पड़ोसी देशों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. शहबाज शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके बेटे और उत्तराधिकारी मोज्तबा खामेनेई को नेतृत्व संभालने पर बधाई दी. 1 मार्च से 5 मार्च के बीच यह जंग मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में फैल गया, जिससे एक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ गई है. ऐसे में पाकिस्तान का निष्पक्ष रहना उसके लिए बड़ी चुनौती साबित होगी.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब से दूसरी बार व्हाइट हाउस लौटे हैं तब से वह ईरान पर हमला करने के संकेत दे रहे थे. पाकिस्तान इसका फायदा उठाते हुए अमेरिका की चापलूसी में लग गया. बीते एक साल के भीतर पाकिस्तान ने ट्रंप की जी-हुजूरी करने के साथ-साथ खुलकर सऊदी अरब का साथ दिया और ईरान को फोन कर शांत रहने की अपील की. हालांकि अधिकतर बार ईरान की टॉप लीडरशिप ने पाकिस्तान की बातों को इग्नोर किया, लेकिन फिर भी शहबाज शरीफ खुद को मध्यस्थता कराने वाला बताते रहे. अब अमेरिकी हमले में खामेनेई की मौत के बाद स्थिति बदल गई है.
पाकिस्तान के लिए बढ़ी चुनौतियां
ईरान के टॉप लीडरशिप की मौत के बाद तेहरान अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलें दाग रहा है. पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल एक डिफेंस डील की है, जिसके तहत एक देश पर हमला दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा. यह डील अब पाकिस्तान के लिये गले की फांस बन चुका है. उसने कभी ये सोचा भी नहीं होगा कि उसे ईरान और सऊदी अरब में से किसी एक को चुनना होगा. दूसरी तरफ ईरान लगातार सऊदी अरब सहित दूसरे खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है. ऐसे में अगर पाकिस्तान सऊदी की तरफ से युद्ध लड़ने आया तो उसे भी ईरान की मिसाइल और ड्रोन का सामना करना पड़ेगा.