यूएस-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का आज (11 मार्च) को 12वां दिन है. युद्ध का असर केवल इन देशों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दुनिया के कई देश इसके दायरे में आ चुके हैं. मिडिल ईस्ट में तनाव से गैस आपूर्ति का खतरा मंडरा रहा है. हालांकि इन चुनौतीपूर्ण हालात से निपटने के लिए भारत ने कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं. आइए जानते हैं इस जंग से दुनिया की इकोनॉमी पर क्या असर पड़ा है, किन देशों को इससे फायदा और नुकसान हो रहा है और भारत के नजरिए से इसके क्या मायने हैं.
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है. दुनिया भर में महंगाई बढ़ेगी. विश्व में गैस के दाम बढ़ रहे हैं और आने वाले समय में ये संकट और बड़ा हो सकता है. स्ट्रेट ऑफ हार्मुज के बंद होने से जहाज फंसे हैं, जिसके कारण शिपिंग के दाम बढ़ेंगे. फर्टिलाइजर के दाम बढ़ेंगे, जिससे किसानों को नुकसान होगा. हवाई यातायात और महंगा हो जाएगा.
जंग से किसे क्या हासिल हो रहा है और आगे क्या हासिल होगा?
अमेरिका को फायदा
– अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एपस्टीन के विवाद की चर्चा को कम कर रहे हैं.
– हथियारों को बेचने का बाजार खुलेगा, अभी ही अमेरिकी हथियार कंपनियों के पास ऑर्डर आ गए हैं, उनके स्टाक आसमान पर हैं.
– अमेरिका जीतता है तो ईरान के तेल पर कब्जा होगा.
रुस को फायदा
– जितनी लंबी जंग चलेगी उतना ही रुस को फायदा होगा, उसका तेल दुनिया खरीदेगी.
– यूरोप को अपने पक्ष में कर लेगा.
– अपने उपर लगे प्रतिबंधो को कम करा सकता है.
– यूक्रेन के साथ जंग में उसे बढ़त मिलेगी.
इजरायल को फायदा
– खाडी देशों में उसका दबदबा होगा.
– इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू को चुनावों जीत से फायदा हो सकता है.
अन्य फायदे वाले देश कनाडा, नार्वे, ब्राजील और युयाना
– तेल के बढ़े दामों का फायदा होगा.
– नार्वे यूरोप को महंगी गैस बेच रहा है.
– कनाडा भी अमेरिका और अन्य देशों को गैस और तेल स्पलाई कर रहा है.
– ब्राजील और गुयाना भी सुरक्षित तेल निर्यातकों की लिस्ट में आ गए हैं.
– दुबई जो अबतक दुनिया का एक फाइनेंसियल हब के तौर पर काम करता था, उसे नुकसान हुआ है. इसका फायदा सिंगापुर और स्विटरलैंड उठा सकते हैं.
नुकसान उठाने वाले देश
– चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय देश — बड़े तेल आयातक, महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
– एशिया के छोटे देश जो खाड़ी देशों से व्यापार करते हैं.
– खाड़ी देश (सऊदी, UAE आदि) खुद के तेल निर्यात बाधित हो सकते हैं. हमले से उनके इंफ्रा को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है.
– ईरान सबसे ज्यादा तबाह हो रहा है, हमलों से हर लिहाज से उसे भारी नुकसान हो रहा है.
– इजराइल और अमेरिका – युद्ध का खर्चा बहुत बड़ा है अरबों डॉलर रोज़, भले ही सैन्य कंपनियां कमाती हों.
– जंग लंबी चली तो यूरोप के देशों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
मानवता का नुकसान
– यूएन ने इसे मानवता के लिए बड़ा संकट माना है.
– इस जंग मे करीब 3000 लोग मारे जा चुके हैं, जिसने करीब 90 फीसदी आम जनता हैं.
– 200 के करीब बच्चों की जान गई है.
– ईरान और लेबनान में करीब 2 लाख लोग बेघर हो गए हैं.
– अस्पताल स्कूल और लोगों के घर धमाकों में उड़ा दिए गए हैं.
– लेबनान से लाखों लोग पलायन कर रहे हैं.
– खाड़ी देशों में मजदूरी के लिए भारत और एशिया के बाकी मुल्कों से गए लोगों की जिंदगी अधर में.
पर्यावरण का नुकसान
– समंदर में युद्ध से समुद्री पर्यावरण को नुकसान हो रहा है.
– मिलिट्री साइट्स, हॉस्पिटल, टायर स्टोरेज आदि पर हमले से फ्यूल, हेवी मेटल्स, PFAS, डायॉक्सिन रिलीज.
– युद्ध से न्यूक्लियर मटेरियललंबे समय में रेडिएशन लीक का डर.
-तेल डिपो और रिफाइनरी पर हमलों से हवा जहरीली हो रही है, जिससे पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा है.