Chinese Boats: दुनिया से नजर बचाकर कुछ बड़ा करने वाला है चीन! समंदर में उतारीं हजारों बोट, क्या है मामला


चीन की मछली पकड़ने वाली हजारों नावें हाल के महीनों में ईस्ट चाइना शी में जियोमेट्रिक शेप में में इकट्ठा देखी गईं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्टिविटी किसी संभावित क्षेत्रीय संकट या सैन्य स्थिति की तैयारी का हिस्सा हो सकती है. जहाजों की एक्टिविटी पर नजर रखने वाले विश्लेषक जेसन वांग ने देखा कि बड़ी संख्या में चीनी मछली पकड़ने वाली नावें दो उल्टे L आकार की पैरेलल लाइनों में खड़ी थीं. इन लाइनों की लंबाई लगभग 400 किलोमीटर तक थी. उस समय करीब 2,000 नावें एक साथ दिखाई दीं और कई हजार जहाज उस व्यस्त समुद्री रास्ते से गुजर रहे थे.

इन जहाजों की पहचान उनके ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) सिग्नल से हुई, जो GPS की तरह काम करता है और जहाजों को टकराव से बचाने में मदद करता है. रिपोर्ट के अनुसार कुछ नावें एक-दूसरे से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर खड़ी थीं और लगभग 30 घंटे तक तेज़ हवाओं के बीच अपनी जगह पर बनी रहीं. इसके बाद वे अचानक अलग-अलग दिशाओं में बिखर गईं. ऐसा माना जाता है कि नेचुरल कंडिशन में इतनी सीधी और सटीक लाइनें बहुत कम देखने को मिलती हैं. यही वजह है कि इस एक्टिविटी ने डिफेंस एक्सपर्ट्स का ध्यान खींचा है. यह घटना ताइवान से लगभग 300 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में दर्ज की गई.

चीन की बोट कहां काम करती है?

जनवरी की शुरुआत में भी लगभग 1,000 चीनी मछली पकड़ने वाली नावों का एक बड़ा समूह इसी इलाके में आयताकार आकार में करीब 400 किलोमीटर तक फैला हुआ देखा गया. हाल ही में करीब 1,200 नावें फिर से दो पैरेलल लाइनों में लगभग 30 घंटे तक एक जगह पर खड़ी रहीं. बता दें कि चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा मछली पकड़ने वाला बेड़ा है, जो येलो शी, ईस्ट चाइना शी और साउथ चाइना शी में काम करता है. इस क्षेत्र में जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम और फिलीपींस के मछुआरे भी मछली पकड़ते हैं. हालांकि इन नावों के एक साथ इकट्ठा होने की वजह पर पूरी तरह सहमति नहीं है, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि वे वहां मछली पकड़ने के लिए नहीं थीं. ग्रेगरी पोलिंग ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बंदरगाह के बाहर मछली पकड़ने वाली नावों का एक साथ इकट्ठा होना उन्होंने पहले कभी नहीं देखा.

चीन कर सकता है ताइवान की घेराबंदी

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक यह चीन की क्षमता का परीक्षण हो सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिक जहाजों को एक साथ जुटाकर सैन्य अभियान में इस्तेमाल किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर ताइवान की घेराबंदी या किसी क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान इन नावों का उपयोग किया जा सकता है. जेनिफ़र पार्कर के अनुसार इतनी अधिक संख्या में नावों का इतनी नजदीकी दूरी पर होना सामान्य मछली पकड़ने की गतिविधि नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि यह गतिविधि सैन्य नजरिये से समन्वय की क्षमता दिखाने वाली हो सकती है. डेविड क्रूड्समा ने भी कहा कि चीन का मछली पकड़ने वाला बेड़ा बहुत संगठित है और संभव है कि जहाजों को किसी विशेष क्षेत्र में मछली पकड़ने से रोकने या किसी अभ्यास के लिए एक जगह इकट्ठा होने का आदेश दिया गया हो. ऐसा माना जा रहा है कि चीन अपने नागरिक जहाजों को सैन्य योजनाओं में शामिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. अगर ताइवान को लेकर कोई बड़ा सैन्य अभियान होता है तो ऐसे नागरिक जहाज सेना की मदद में इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

चीन का ताइवान के खिलाफ प्लान

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने हाल के वर्षों में ताइवान के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाया है. यूनाइटेड स्टेट्स डिफेंस डिपार्टमेंट  की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार चीन 2027 तक ऐसी सैन्य क्षमता हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जिससे वह ताइवान के खिलाफ युद्ध लड़ने में सक्षम हो सके. कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की मैरीटाइम मिलिशिया जरूरत पड़ने पर सैन्य सहायता देता है. वह इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकता है. यह नेटवर्क पहले भी साउथ चाइना शी में चीन के क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है.



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