World War: | US-Israel Iran War tensions rising in many places like Russia-Ukraine Afghanistan-Pakistan Japan-North Korea conflict


इस वक्त दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जंग छिड़ी हुई है. ताजा लड़ाई मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल का ईरान से जारी है. इस युद्ध की शुरुआत बीते महीने 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सीधा हमला किया था. इसके जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए. हालांकि, इस दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई थी. इसके अलावा कई अन्य नेताओं को अमेरिकी-इजरायली हमले में मार दिया गया था. मौजूदा वक्त में मिडिल ईस्ट में स्थिति गंभीर बनी हुई है. लगातार दोनों पक्षों तरफ से हमले जारी है. इस वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी ईरान ने बंद कर दिया है, जिसकी वजह से दुनिया भर में तेल संकट पैदा हो गया है. ये एक बेहद जरूरी रूट है, जिसकी मदद से दुनिया का 20 फीसदी तेल का आयात होता है.

मिडिल ईस्ट के अलावा भारत के पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव जंग की शक्ल ले चुका है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के दिनों में पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ काबुल और कंधार में कई हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में नागरिक ठिकानों और Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाया गया था. पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि TTP के लड़ाके अफगान सीमा के अंदर छिपकर हमले की योजना बनाते हैं. इन हमलों के बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी. तालिबान का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान के कई शहरों में ड्रोन हमले किए. इनमें कोहाट, कराची और इस्लामाबाद जैसे इलाके शामिल थे. इसके अलावा कई सैन्य ठिकानों पर भी कब्जा किया था. अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें पाकिस्तानी सैनिकों के साथ नागरिक भी शामिल हैं. अफगानिस्तान ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को कब्जे में भी ले लिया. संयुक्त राष्ट्र (UNAMA) की रिपोर्ट के अनुसार, 26 फरवरी से 5 मार्च 2026 के बीच पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों में 56 अफगान नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं. इसके अलावा  अफगान तालिबान ने दावा किया है कि इस लड़ाई में उसने 150 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है और कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है.

रूस और यूक्रेन युद्ध
 
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में से एक है. यह संघर्ष फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, जब रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला किया. तब से दोनों देशों के बीच लगातार लड़ाई जारी है. इस युद्ध का असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ा है. 24 फरवरी 2022 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की. इसके बाद रूस की सेना ने कई दिशाओं से यूक्रेन में प्रवेश किया. रूस का कहना था कि यह कार्रवाई उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इसे सीधा हमला और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया.

रूस-यूक्रेन का मिसाइल अटैक

रूस ने युद्ध के दौरान यूक्रेन पर हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल ओरेश्निक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल कर चुका है. इसे बेहद तेज और घातक हथियार माना जा रहा है. इस मिसाइल का उपयोग ल्वीव और अन्य इलाकों में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए किया गया था. रूस की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन हमलों ने यूक्रेन के कई बिजली संयंत्रों और पावर ग्रिड को नुकसान पहुंचाया गया है. रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से भी हमला किया है. दूसरी ओर यूक्रेन भी रूस के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है. यूक्रेनी सेना ने रूस के अंदर स्थित सैन्य ठिकानों, तेल रिग और मिसाइल उत्पादन संयंत्रों को निशाना बनाया है. यूक्रेन ने ब्रांस्क ओब्लास्टक्षेत्र में ड्रोन और पश्चिमी देशों से मिली मिसाइलों के जरिए कई हमले किए गए हैं.

जापान और उत्तर कोरिया के बीच जंग के हालात

जापान और उत्तर कोरिया के बीच कई वर्षों से तनाव बना हुआ है. इस तनाव का मुख्य कारण उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु परीक्षण हैं, जब भी उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण करता है, जापान और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ जाती है. शनिवार (13 मार्च 2026) को ही जापान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि उत्तर कोरिया ने संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की है. इस संबंध में आगे की जांच जारी है. बता दें कि कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ता यह तनाव केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पूर्वी एशिया और दुनिया की सुरक्षा पर भी पड़ता है. उत्तर कोरिया समय-समय पर लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण करता है. कई बार ये मिसाइलें जापान के ऊपर से गुजरती हैं या उसके समुद्री क्षेत्र के पास गिरती हैं.



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